Tuesday, 28 February 2012

फैसला चाहिए आन द स्पॉट CITY NEWS YNR



                                       फैसला चाहिए आन द स्पॉट 
पीड़ित परिजनों के साथ शहर के लोगों ने भी अधिकारियों से मांगा जवाब 

 हादसे के बाद पहली बार सभी पक्ष एक साथ अपने-अपने ब्यान दर्ज कराने पहुंचे। लघु सचिवालय में इंसाफ मिलने पहुंचे मृत युवकों के परिजन कभी इस अधिकारी तो कभी उस अधिकारी के कार्यालय में धक्के खाते रहे। छह घंटे तक चली इस कार्रवाई में जहां सभी ने एसडीएम के समक्ष अपने-अपने ब्यान दर्ज कराए। वहीं, मामले का कोई भी हल न मिलने पर मृत युवकों के परिजनों ने प्रशासन को 24 घंटे का समय देते हुए मंगलवार की सुबह 11 बजे तक कार्रवाई करने की बात कही। इस दौरान आरोपी पुलिस कर्मी पर मामला दर्ज न होने पर परिजनों व शहर के लोगों ने खुद ही आगामी कार्रवाई करने की चेतावनी तक दे डाली।

लघुसचिवालय में 11 बजे का समय था, दोनों युवकों के परिजन एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अन्य पक्षों की बांट में बैठ गए। एसडीएम दवेंद्र कौशिक  दोनों युवकों के परिजनों में भास्कर के पिता विरेंद्र, बहन कविता और सचिन के पिता ओमप्रकाश व गड़वाल सभा के भारतभूषण व ललीत शर्मा  से बातचीत जारी थी। समय की घड़ी जैसे ही 11 बजकर 20 मिनट पर पहुंची, तो लघुसचिवालय में हलचल बढ़ चली। देखते ही देखते लघुसचिवालय इस मामले में कुछ संस्थाओं के दर्जनों लोग भी इंसाफ की मांग को लेकर पहुंचने लगे। जिनमें आर्ट आॅफ लिविंग की सदस्य जितेंद्र चढ़ा, अंजू गांधी, राजेश गढ़, डाक्टर ईश चढ़ा, अनू साहनी, कमलदीप, सेवा भारती की प्रवीण भाटिया, मनमोहन समेत दर्जनों लोग सीधे-सीधे एसडीएम कार्यालय में दाखिल हो गए। जहां पहुंचकर उन्होंने मामले से जुडेÞ प्रश्नों के तीर एसडीएम समक्ष छोड़ दिए। इस पर एसडीएम देवेंद्र कौशिक ने जांच में दखल न दिए जाने की बात कहीं। करीबन 15-20 मिनट के एसडीएम व उक्त लोगों के बीच हुए वार्तालाप में कई प्रश्न ऐसे उठे जिनका जवाब एसडीएम नहीं दे सकें। यहां तक के लोगों के पुछने पर जोगेंद्र सिंह कहा है? इस पर एसडीएम द्वारा  जवाब देते हुए कहा गया कि कमेटी की बैठक की सूचना उन्हें दे दी गई थी, किंतु बुलाए जाने का अधिकार मेरे पास नहीं है। 20 मिनट के इस वार्तालाप से असहमती जताते हुए, उक्त विभिन्न संस्थाओं के लोग सीधे-सीधे डीसी कार्यालय की ओर रुख कर गए। एक ओर जहां एसडीएम कार्यालय में पीड़ित परिवारों समेत कमेटी सदस्यों की बयानबाजी कार्रवाई की जा रही थी। तो दूसरी ओर उक्त विभिन्न संस्थाओं के लोग डीसी कार्यालय में 11:30 बजे बैठ गए। उन्होंने वहीं मामले से जुडेÞ प्रश्नों चिन्ह का चिट्टा डीसी समक्ष रख दिया। जिस पर डीसी अशोक सांगवान ने ‘इंक्वायरी हो रही है’ यह बात कहीं। जिस पर सीधे-सीधे उक्त लोगों द्वारा  प्रश्न किया गया कि इंक्वायरी की तय समय सीमा नहीं है, न ही आरोपी के खिलाफ सीधे-सीधे कार्रवाई की जा रही है। इस पर डीसी अशोक सांगवान द्वारा उनकी मांग पर इंक्वायरी का समय निर्धारित करने का आश्वासन देकर लोगों के आक्रोश को शांत करना चाहा।  तो साथ ही मामला दर्ज कराए जाने के लिए डीसी से उन्हें एसपी से मिलने को कहा। यह बात सुनकर असंतुष्ट होकर इन्हीं लोगों का आक्रोश 12:00 बजे डीसी कार्यालय के बाहर नारेबाजी के रुप में निकला। यहां से सीधे-सीधे लघुसचिवालय की सीढ़ियां चढ़ दर्जनों लोगों द्वारा एसपी कार्यालय में 12:05 मिनट पर एसपी समक्ष भी इन्हीं प्रश्नों को रखा।
पूरे डेढ़ घंटे एसपी कार्यालय में रही गहमा-गहमी
समय था 12:05 बजे, एसपी कार्यालय में प्रवेश करने के बाद एससपी मितेश जैन के समझ बैठे इन लोगों में डा. ईश चढ़ा द्वारा एसपी से जोगिंद्र सिंह के खिलाफ सीधे-सीधे कार्रवाई न किए जाने का कारण पुछा। एसपी ने इस पर जवाब देते हुए कहा ‘दो अलग-अलग उच्चाधिकारियों द्वारा इस मामले की इंक्वायरी चल रही है’। डा. ईश चढ़ा ने जवाब सुनने से पूर्व ही एसपी से सावल किया कि आम लोगों के लिए व पुलिस के लिए अलग-अलग कानून है? इस पर एसपी ने कहा ‘नहीं’। लोगों ने सीधे-सीधे एसपी से कहा यदि कानून अलग नहीं तो फिर जोगिंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यो नहीं? इस पर उन्होंने थोड़े देर मौन रहकर जवाब दिया कि ‘जांच चल रही है।’ समय बढ़ चला था, घड़ी में 12:45 होने को थे। एसपी से सीधी-सीधी लोगों की बातचीत जारी थी, कि जिसमें गढ़वाल सभा के भारतभूषण ने कहा कि क्या अपने अफसर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए डीजीपी या सीएम की अनुमति की जरुरत है?  हमे बताएं हम लोग इंसाफ के लिए सीएम तक जाने से भी गुरेज नहीं करेंगे। इस पर एसपी मितेश जैन मौन साध गए।  यहां एसपी को मौन होता देख उक्त लोगों ने उन्हें 24 घंटे में मामले में ठोस कार्रवाई करने का अल्टीमेटम देते हुए कहां कि इसके बाद इंसाफ के लिए भुख हड़ताल पर बैठने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।
एसपी कार्यालय में जहां पूरे डेढ़ घंटे उक्त वार्तालाप हुआ। तो वहीं कमेटी की बैठक एसडीएम कार्यालय में चल रही थी। जहां   सभी पक्षों के ब्यान लिए जा रहे थे, एसपी कार्यालय से वापस आते ही लोगों ने लघुसचिवालय की सीढ़ियों से उतरने के दौरान ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी। यहीं रोष उन्होंने एसडीएम कार्यालय के बाहर भी जारी रखा। तो पीड़ित परिवारों के परिजनों के साथ ये लोग लघुसचिवालय में शाम पांच बजे तक डटे नजर आए। शाम पांच बजे जाकर सभी पक्षों की ब्यानबाजी संपन्न हो सकी।
मामले से जुडे प्रश्नों का बैंक था लोगों के पास
आर्ट आॅफ लिविंग की सदस्य जितेंद्र चढ़ा, अंजू गांधी, राजेश गढ़, डाक्टर ईश चढ़ा, अनू साहनी, कमलदीप, सेवा भारती की प्रवीण भाटिया, मनमोहन, गडवाल सभा के भारतभूषण, ललीत शर्मा समेत दर्जनों लोगों के पास मामले से जुडेÞ प्रश्नों को बैंक तैयार था। तीन पर्चो के इस प्रश्नों की लिस्ट के अलावा भी लोगों के जहन में उठे सवालों को उन्होंने एसडीएम दवेंद्र कौशिक, डीसी अशोक सांगवान व एसपी समक्ष रखा। जिनमें:-
- 12 दिन बीतने पर भी क्यों नहीं एफआईआर?
- झगड़े के बाद रेलवे ट्रेक से मिले दो युवकों के शवों के परिजनों के ब्यान लेने में 12 दिन का समय क्यों लगा?
- बच्चों को जबरन घर से उठा ले जाना और उनका मृत मिलना। यह कौन सा आॅफेंस है?
- पोस्टमार्टम की विडियों रिकार्डिंग क्यों नहीं?
- पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में दोनों युवकों के कई जगह फेक्चर कैसे?
किसने क्या दिए ब्यान
सरपंच सुरेश राणा ने एसडीएम समक्ष अपने ब्यान में बताया कि 14 फरवरी की सुबह बैंक कालोनी में झगड़ा हुआ था। जिसके लिए एसएचओ फर्कपुर व जोगिंद्र सिंह मौके पर पहुंचे थे। उसके बाद जोेगिंद्र सिंह भास्कर को अपने साथ ले गया था। वहीं, भास्कर के सामने रह रही मक्खन कौर ने अपने ब्यान में बताया कि जोगिंद्र सिंह भास्कर अपनी मोटरसाइकिल पर घर ले गया था। बैंक कालोनी की सुमित्रा गोसाई ने अपने ब्यानों में बताया कि जोगिंद्र सिंह ही भास्कर व सचिन को इक्ट्ठे एक मोटरसाइकिल पर लेकर गया था। वहीं, सचिन के परिवार की तरफ से अश्वनी व तरसेम ने अपने ब्यान में कहा कि भास्कर व सचिन को जोगिंद्र सिंह अपने साथ ले गया था। वहीं, भास्कर की बहन कविता गोसाई ने अपने ब्यान में कहा कि उसका भाई भास्कर घर मेें सोया हुआ था जोगिंद्र सिंह ने आकर उसके भाई को उठाया और जबरन अपने साथ ले गया। इसी बीच मुझे व मेरी मां को अपशब्द भी कहे।
क्या कहा जोगिंद्र सिंह ने
गांधीनगर चौंकी इंचार्ज जोगिंद्र सिंह ने एसडीएम देवेंद्र कौशिक को दिए ब्यान में कहा कि ‘मुझे किसी का फोन आया था कि बैंक कालोनी में झगड़ा हुआ है। मैं उसे देखने गया था’। इस पर एसडीएम द्वारा पूछे जाने पर किसका फोन आया था। कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने अपनी बात को पलटते हुए कहा कि कंट्रोल रूम से आया था। और मैं उन्हें अपने साथ नहीं ले गया था। भास्कर ने मुझसे सचिन के घर तक लिफ्ट मांगी थी। उसके बाद मैने उसे सचिन के घर छोड़ा और वहां से दोनों को लेकर आईटीआई छोड़ा। उसके बाद मैं गांधीनगर चौंकी चला गया। वहां से मेरी ड्यूटी वैलेंटाइन-डे पर लगा दी। वहां से मुझे फर्कपुर थाने बुला लिया गया, उसके बाद क्या हुआ मुझे पता नहीं। लेकिन शाम को मुझे दो लड़कों के ट्रेन से कटने की सूचना मिली और पता चला कि ये वहीं लड़के है, जिनको मैने मेडिकल कराने के लिए आईटीआई पर छोड़ा था। कहीं न कहीं दोनों लड़कों को चोट लगने की बात पुलिस कबूल रही है।









Friday, 24 February 2012

खुद का दामन मैला, दूसरों पर सख्ती CITY NEWS YNR




                     खुद का दामन मैला, दूसरों पर सख्ती
              अधिक्तर सरकारी स्कूलों में तय नियम-मापदंड नहीं पूरे

विनोद धीमान।
 आरटीई के तहत निजी स्कूलों पर मापदंडो को लागू किए जाने पर विभाग सख्त रवैया अपनाए हुए है। किंतु वि•ााग खुद अपने दामन में कई खामियां लिए हुए है। जी हां! अधिक्तर सरकारी स्कूल शिक्षा वि•ााग द्वारा तय निमयों-मापदंडों को पूरा नहीं करते है। ऐसे में आरटीई योजना का ढांचा खोखला लगने लगा है, तो वहीं, निजी स्कूलों की तर्ज सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाने की डगर भी मुश्किल लगने लगी है।
गौरतलब है कि आरटीई यानि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार से संबंध विद्यार्थियों को शिक्षा देने का प्रावधान किया है। तो साथ ही, ऐसे बच्चों को  किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए सरकारी स्कूलों के अलावा निजी स्कूलों के लिए मापदंड तय कर उनकी पालना करने के निर्देश दिए गए। ऐसा न करने पर विभाग द्वारा एक ओर निजी स्कूलों के खिलाफ सख्ती से पेश आया जा रहा है। तो दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की ओर विभाग अनदेखा रवैया अपनाए हुए है। जिसे विभाग द्वारा तय मापदंडो की कसौटी पर खरे न उतरते जिले-भार के सैकड़ो सरकारी स्कूल खुद-ब-खुद बयान कर रहे है। जो हाल ही में विभाग द्वारा निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाने की योजना को भी  धता बता रहे है।
जिले में स्कूलों की संख्या
प्राथमिक स्कूल- 638
मिडल स्कूल- 323
हाई स्कूल- 149
सीनियर सकेंडरी - 139
ये है नियम-मापदंड
- दो एकड़ जमीन पर ही हो सेकेंडरी स्कूल।
- स्कूलों में कमरों के लिए:-
लंबाई- 24 फिट
चौड़ाई- 18 फिट
ऊंचाई- 10 फिट
- कमरों में बैठने के  लिए बेंच की उचित व्यवस्था हो।
- स्कूल में कमरों के सामने 10 फिट चौडाÞ बरामदा हो।
- स्कूल में लाइब्रेरी रुम 48 बाई 18 साईज का हो।
- लाइब्रेरी में प्रतियोगिताओं की किताबें व समाचार पत्र हो।
- कंप्यूटर, सांस्कृतिक व आर्ट एंड क्लचर गतिविधियों के लिए अलग से कमरा हो।
- स्कूल में खेलने का प्रर्याप्त मैदान हो।
- आग बुझाने के लिए यंत्र हो।
- स्कूल की पांच फिट ऊंची चारदीवारी हो।
- स्कूली बच्चों व विष्यों के हिसाब से शिक्षक व सेवादार के पद भरे हो।
अधिक्तर नॉर्मस नहीं करते स्कूल पूरे
- जिनमें अधिक्तर स्कूलों में खेल के लिए मैदान उपलब्ध नहीं है। जिनमें माडल टाउन स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, वर्कशाप स्थित वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, जगाधरी स्थित वरिष्ठ माध्यममिक, पुरानी सब्जी मंडी स्थित व माडल कालोनी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, हमीदा स्थित राजकीय हाई स्कूल, चांदपुर स्थित राजकीय हाई स्कूल, गोबिंदपुरा स्थित राजकीय मिडल स्कूल, गोबिंदपुरी स्थित राजकीय मिडल स्कूल। आदि के अलावा जिले-भर में सैकड़ो ही ऐसे स्कूल है जहां खेलने को मैदान उपलब्ध नहीं है।
- सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या व विष्यों के मुताबिक शिक्षकों व हैडमास्टर की संख्या भी  पर्याप्त नहीं है। बता दें कि जिले के 20 हाई सकेंडरी  स्कूल बिना प्रिंसीपल के चल रहे है, तो वहीं, 30 हाई स्कूल बिना हैड मास्ट के चल रहे है। इसी प्रकार जिले के 320 स्कूल बिना हैडमास्ट के चल रहे है। वहीं, बच्चों की संख्या के मुताबिक जिले में 3120 शिक्षक होने चाहिए। किंतु मौजूदा समय में केवल 1800 शिक्षकों है। तो 1920 पद अभी  भी  रिक्त पड़े है।
- स्कूलों में छात्रों के बैठने के लिए अब भी  पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बेंचों का उचित प्रबंध न होने के कारण अधिक्तर स्कूलों में अब भी  टाट का सहारा लिया जाता है।
इसी प्रकार से अन्य कई नॉर्मस स्कूलों  में पूरे नहीं है। जिन्में अधिक्तर स्कूलों में लाईब्रेरी, अग्निश्मन यत्रं, कमरों की पर्याप्त लंबाई-चौड़ाई आदि तय मापदंडो के मुताबिक नहीं है।
वर्जन
यदि बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी है तो सबसे पूर्व अध्यापकों की कमी को पूरा किया जाना चाहिए। यहीं नहीं, बच्चों के लिए यदि स्कूल के पास पर्याप्त मात्रा में ग्राउंड नहीं है। तो सरकार को चाहिए कि उसके आसपास खेलने के लिए मैदान की व्यवस्था की जाए।
प्रदीप सरीन, जिला प्रधान, हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ।
वर्जन
विभाग की ओर से जिन स्कूलों में कमियां है, उन्हें पूरा करने के लिए साधन जुटाए जा रहे है। जल्द ही सभी  को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छी सुविधा भी  मिल पाएगी। इसके लिए उच्चाधिकार्यो को सूचित किया जा चुका है।
जगजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी।

Thursday, 23 February 2012

पानी मिलेगा विदाउट मीटर CITY NEWS YNR


  पानी मिलेगा विदाउट मीटर!
पानी के बिल के लिए फ्लैट रेट निर्धारि   

 सप्लाई योजना अब मीटर रीडिंग के फेर में न उल­ोगी और न ही मीटर रिडिंग कार्यो में विभाग को समय बरबाद करने की जरुरत पडेÞगी। अब उपभोक्ताओं को मीटर रिडिंग के आधार पर बने बिल का नहीं, बल्कि विभाग द्वारा तय किए गए फ्लैट रेट का भूगतान करना होगा। ऐसा ही कुछ निर्णय लेकर जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति विभाग द्वारा यह योजना लागू कर दी गई है। इसमें घरेलु उपभोक्ताओं के लिए विभाग ने एक माह का बिल 61 रुपए, तो कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए एक हजार रुपए  प्रति माह फ्लैट रेट तय किया है। दोनों ही उपभोक्ताओं को अगामी बिलों के भूगतान इसी फ्लैट रेट पर करना होगा। 
गौरतलब है कि इससे पूर्व जनस्वास्थ्य एंव जलापूर्ति विभाग की ओर से पानी सप्लाई के कनेक्शन के लिए उभोक्ताओं को आवेदन करना होता था, जिसके बाद कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं को पानी इस्तेमाल की मीटर रिडिंग के हिसाब से बिल का भू गतान करना पड़ता था। किंतु अब ऐसा करने के स्थान पर नई योजना के तहत अब पानी कनेक्शन के लिए मीटर लगवाने की जरुरत नहीं है। कोई भी उपभोक्ता आसानी से सीधे विभागीय कार्यालय में कनेक्शन के लिए आवेदन कर योजना का ला•ा ले सकता है। जिसके बाद घरेलू उपभोक्ता को केवल उसके घर पर आने वाले हर तीसरे व चौथे माह में 61 रुपए  प्रति माह के हिसाब से बिल अदा करना होगा। वहीं, कमर्शियल उप•ोक्ता को एक हजार रुपए प्रति माह के हिसाब से बिल आदा करना होगाशहर मेंसप्लाईकनेक्शन घरेलू - 26 हजार कमर्शियल - 450 इसलिए लिया किया फ्लैट रेट निर्धारित
वाटर सप्लाई योजना के तहत कई बार मीटर रिडिंग के लिए विभागीय कर्मियों को उपभोक्ताओं के घरों तक जाना होता था, तो इसी रिडिंग के आधार पर बिल बनाकर उपभोक्ताओं के भाजने का कार्य भा  किया जाता था। ऐसे में स्टॉफ की कमी के कारण यह कार्य काफी मशक्त भारा व समय की बरबादी न हो इसके लिएविभाग को घरेलु व कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए फ्लैट रेट तय करने का निर्णय लेना पड़ा। पहले बिल अदायगी के दो आभाप्शनपानी के बिल अदाइगी के लिए इससे पूर्व उपभोक्ताओं के पास दो आॅपशन प्रयुक्त थे। जो इस प्रकार है।:- पहले आभापशन में उपभोक्ता द्वारा अपने मकानों में लगवाएं गए मीटर से दूसरव तीसरे माह विभागीय कर्मचारी 
द्वारा रीडिंग ली जाती थी। इसी रिडिंग से पिछली रिडिंग के बीच के अंतर को तीन माह का पानी इस्तेमाल किया जाना माना जाता था। तो साथ ही, उपभाक्ताओं से मकान की लंबाई और चौड़ाई को ध्यान में रखते हुए प्रति एक हजार लीटर पानी पर सवा रुपए से चार रुपए तक का बिल लिया जाता था। इसके अलावा पानी के एक चौथाई हिस्से का सीवर में प्रयुक्त दिखाकर, उसका खर्च भी  बिल में जोड़ जाता था। - दूसरे आॅप्शन में विभागीय टीम आवेदनकर्ता के मकान का सर्वे करती थी। इस दौरान यह देखा जाता था कि उपभाक्ता के मकान में ताजा पानी की कितनी टूटियां व टायलेट हैं। इन उपभा क्ताओं में एक टूटी और एक टायलेट वाले को 25 रुपए और दो टूटियां और अधिक टायलेट वाले को 48 रुपए महीना बिल •ारना होता था। यह बन बिल का हिसाबवाटर सप्लाई योजना में विभाग द्वारा किए गए फेरबदल के मुताबिक घरेलु उप•ोक्ताओं से 61 रुपए बिल के रुप में लिए जाने है। जिसमें 48 रुपए पानी के लिए तो 12 रुपए सीवर के पानी की निकासी के लिए और एक रुपया प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के रप में शामिल है। इसी प्रकार कमर्शियल उपभा क्ताओं सेविभाग ने फिक्स बिल योजना के तहत एक हजार रुपए बिल वसूलेगा। 

इस योजना से विभाग का भी  समय बचेगा और बिल में आने वाली शिकायतों से •ाी निजात मिल सकेंगी। वहीं, अवैध कनेक्शनों का दायरा भा  कम हो सकेंगा।
एके भारद्वाज, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एंव जलापूर्ति विभाग।


Thursday, 16 February 2012

अनसेफ जिगर के टूकडे CITY NEWS YNR



                                                     अनसेफ जिगर के टूकडे
                                                  लगातार बढ़ रही बच्चों के लापता होने की वारदात
                                                   बीते वर्ष में हुई 13 वारदात, 12 अब भी अनसुल­ जी 
         विनोद धीमान
 यदि आप भी अपने जिगर के टूकड़ों को शहर में अकेला छोड़, उन्हें महफूज समझ रहे है। तो यह भूल आपके लिए व आपके जिगर के टूकड़ें दोनों के लिए भारी साबित हो सकती है। लगातार हो रही बच्चों के लापता व अपहरण की वारदातों को देखते हुए सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्विनसिटी में बच्चा चोर गिरोह सक्रिय है। तो ऐसे में अभिभावकों को जरा होशियार रहने की जरुरत है। अगल-अगल जगहों से संदिग्ध परिस्थितियों में व घर से लापता हुए बच्चों के ग्राफ पर नजर दौड़ाई जाए तो बीते साल में इस तरह की 13 वारदात हुई। वहीं मौजूद साल में भी यह क्रम जारी है। मौजूदा वर्ष के दो माह भी नहीं बीते है कि दो अपहरण की वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है। ऐसे में पुलिस प्रशासन भी इन वारदातों पर अंकुश लगा पाने में नाकाम साबित हो रहा है। इन मामलों में पुलिस कार्रवाई गायब हुए बच्चों के पोस्टर बनवा उन्हें थानों के बाहर लगवा देने भर तक सिमटी नजर आ रही है।
तीन साल में लापता बच्चों के 26 मामले
2012 - 02
2011 - 13
2010 - 11
बीते वर्ष के 13 मामलों में 12 अब भी अनसॉल्व
जिलें में साल 2011 में लापता हुए बच्चों के 13 मामले हुए। जिसमें से 12 अब भी अनसुलछे है। एक मामला सुल­ाा भी तो वहां भी गायब हुए बच्चें को सही सलामत घर पर नहीं पहुंचाया जा सका था। दशहरे के दिन घर से लापता हुए मुकुल का शव 14 दिन बाद पुलिस को कुरुक्षेत्र से बरामद हुआ। मामले में पुलिस ने तीन के खिलाफ मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया। बीते वर्ष पुलिस को बस इसी मामले में कामयाबी हासिल हो सकी, वह भी अपहरण हुए बच्चें के सही सलामत घर लौटने की वजह से अधुरी हुई साबित हुई। तो अभी हाल ही में आईटीआई के समीप से अगवा हुई चरणजीत कौर अपहरण के दो दिन बाद सकुशल घर लौट आई। चरणजीत को कौन अगवा कर ले गया था। इसका भी आज तक कुछ पता नहीं चल पाया हैं।

पुलिस प्रशासन का हर संभव प्रयास रहता है कि इस तरह की वारदातों पर अंकुश लगाया जा सके। किंतु कई मामलों में बच्चे खुद भी घर से परेशान होकर चले जाते है। ऐसे में उन्हें तलाश करने में समस्या आती है। अभी हाल ही में पुलिस द्वारा बच्ची के लापता होने का मामला सुलझाया है। बीते सालों के हुए ऐसे मामलों पर भी हर पहलु पर जांच की जा रही है।
फूल कुमार, डीएसपी हेडक्वाटर्र।

                                             ट्यूशन पढ़ने गए बच्चे का अपहरण!

जगाधरी वर्कशाप। गुरुवार देर शाम घर से ट्यूशन पढ़ने के लिए गए 14 वर्षीय लड़के को दो बाइक सवार नकाबपोश युवक अगवा कर अपने साथ ले गए। पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर उक्त मामले में कार्रवाई शुरु कर दी है। फिलहाल इस मामले में भी पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लग सका है।
लक्ष्मी गार्डन निवासी मनोहर लाल ने बताया कि उसका बेटा विकास न्यू हैप्पी स्कूल में नौवी कक्षा में पढ़ता है। रोजाना की भांति वह गुरुवार को भी स्कूल से आने के बाद अपने दोस्त शुभम, साजन व मितेश के साथ घर से शिवपुरी कालोनी में ट्यूशन पढ़ने के लिए गया था। मनोहर ने बताया कि शाम को विकास व उसके दोस्त ट्यूशन पढ़कर वापस घर लौट रहे थे। रास्ते में शिवपुरी कोलानी में दो नकाबपोश युवकों के बुलाए जाने पर विकास उनके समीप चला गया और देखते ही देखते वह दोनों लोग विकास को अपने साथ बाइक पर बैठाकर ले गए। उन्होंने बताया कि इस बात की सूचना परिवार वालों को विकास के दोस्तों ने घर पर दी। विकास के गायब होने की खबर सुनकर परिवार वालों ने विकास की तलाश आसपास के क्षेत्र में की। किंतु देर रात तक उसके न मिलने पर, उन्होंने इसी शिकायत पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिवार वालों व विकास के दोस्तों से पूछताछ कर उक्त बाइक सवार लोगों की तलाश के लिए टीमें बनाकर संबंधित क्षेत्र में छानबीन की। किंतु देर रात तक जारी रही पुलिस कार्रवाई में उक्त लोगों का कोई सुराग हाथ नहीं लग सका। वहीं, शुक्रवार को भी इस मामले में पुलिस के हाथ ज्यों के त्यों खाली थे। पुलिस कार्रवाई में विकास का कोई सुराग हाथ न लग पाने से परिजनों की चिंता गहराने लगी है। घर पर विकास की मां सुमन का रो रोकर बुरा हाल हो गया है। बार-बार मां अपने बेटे विकास की तसवीर हाथ में लेकर रोने पर विवश है।
कोई अपना तो नहीं ले गया?
पुलिस जांच में विकास के साथ ट्यूशन पढ़कर लौट रहे तीनों दोस्तों शुभम, साजन व मितेश से पूछताछ में उन्होंने बताया कि विकास को ले गए उक्त बाइक सवार युवकों ने विकास को उसके नाम से ही बुलाया था। जिस पर विकास ने भी उनमें से एक युवक को ‘आसू’ बुलाकर अपने आने की बात कही थी। इस पर पुलिस व परिजनों द्वारा संदेह जताया जाने लगा है कि विकास को ले जाने में कोई अपना ही तो नहीं था?
तीन बहनों का था एकलौता भाई
विकास तीन बहनों का इक्लोता भाई है, परिवार में विकास सबसे छोटा है। जिसके लापता होने के बाद से उसकी रजी, सोनिया व मोनिका भी गमगीन माहौल में है। तीनों बहने अपने छोटे भाई के कहीं चले जाने पर आंसुआ से नम है।
वर्जन
देर रात को शिकायत मिलने पर उक्त गायब हुए लड़के की तलाश संबंधित क्षेत्र में की गई थी। मामले में परिजनों व उसके दोस्तों से भी पुछताछ की गई। किंतु फिलहाल कोई सुराग नहीं लग सका है, अभी जांच जारी है।
प्रमोद कुमार, फर्कपुर थाना प्रभारी।



Friday, 27 January 2012

दिला सकूं प्रतिभा को आयाम...CITY NEWS YNR


  दिला सकूं प्रतिभा  को आयाम...
जडोदा स्थित प्राथमिक स्कूल में कराई गई विभान्न प्रतियोगिताएं 
प्रतिभा  तराशने के लिए समाज सेविका द्वारा गांव-गांव को मुहिम से जोड़ने का लिया संकल्प 

। स्कूली स्तर पर बच्चों के बीच विभान्न प्रतियोगिताओं का आयोजन कर उनकी प्रतिभा  को तराशने की एक समाज सेविका द्वारा छेड़ी गई मुहिम अब गांव-गांव पहुंचेगी। बात हुडा सेक्टर- 17 निवासी डा. मानसी अबहोरी द्वारा शुरु की गई एक अनोखी पहल की। डा. मानसी ने बताया कि अब उन्होंने गांव-गांव तक जाकर स्कूली बच्चों के बीच विभान्न प्रतियोगिता का आयोजन कर उनकी प्रतिभा  को उच्च स्तर पर पहुंचाने का संकल्प लिया है, जिसका शुभआरभा  आज जगाधरी खंड के गांव जड़ौदा स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल से हुआ। जहां पहली से पांचवी कक्षा तक के 150 से अधिक नौनिहालों के बीच नृत्य, गायन, क्वीज, ड्राइंग व अन्य प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया। जिसके माध्यम से बच्चों में भा रतीय संस्कृति, राष्टभायता की भावना पैदा हो सके इसके लिए हर प्रतियोगिता में देश व देश से जुडेÞ इतिहास को दिखाने का प्रयास किया गया। इसके अलावा प्रतियोगिता में बच्चों को भारण हत्या पाप है, लड़का-लड़की एक समान आदि समाज में फेली बुराईयों को दूर करेने का प्रयास किया गया। वहीं, प्रतियोगिता में कोई जीत-हार का चयन किए जाने के स्थान पर सबको एक समान डा. मानसी अबहोरी द्वारा पुरुस्कार देकर सम्मानित किया गया। 
गांव-गांव पहुंचेगी ये मुहिम
डा. मानसी अबहोरी ने बताया कि उनका प्रयास है कि 2012 के अंत तक जिला यमुनानगर के छह ब्लॉक रादौर, सदौरा, बिलासपुर, मुस्तफाबाद, जगाधरी व छछरौली के गांव-गांव तक इस मुहिम को पहुंचने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि इस मुहिम में उनका हर संभव प्रयास रहेगा कि गांव के बच्चों की प्रतिभा  को तराशकर उन्हें जिला व राज्य स्तर पर  प्रतिभा  दिखाने के लिए पलेटफार्म दिला सकूं।


प्रतियोगिता के विजेता बच्चे कार्यक्रम की आयोजक डॉ. मानसी के साथ।


                                                                             विनोद धीमान



पंजाबी संस्कृति का रस घोलती लोहड़ी CITY NEWS YNR

   

पंजाबी संस्कृति का रस घोलती लोहड़ी
ट्विनसिटी में लोहड़ी मनाने के प्रति बढ़ा लोगों को उत्साह
स्कूल-कालेजों के अलावा पंजाबी सभा व संगठनों द्वारा की जा रही विशेष तैयारी
समय के साथ पर्व मनाने के बदले पर्व मनाने के तौर-तरीके

‘13 जनवारी! सर्द हवाओं से राहत पहुंचाते अग्नि के ताप का वह सुखद आनंद में प्राचीन लोकगीतों व मूंगफलियों -रेबड़ियों के सेवन के दौरान गिद्दा-भंगडा। यह सब सुन आप पंजाब के सार्थक दर्शन व लोहडी पर्व का सार्थक सा चित्रण मन-मस्तिष्क पटल पर बनने लगता है। पंजाब से कौसो दूर होने के बावजूद भी ट्विनसिटी में पर्व को लेकर तैयारियां विशेष है, जिसके लिए कई सभाओं व संगठनों ने पंजाबी संस्कृति की झलक से शहरवासियों को रूबरू कराने के लिए पर्व पर विशेष प्रकार के आयोजनों करने की ठानी है, तो घर-परिवार में बेटी व बेटे और बहु के आने की खुशी में इस बार लोहड़ी पर्व को धूम-धाम से मनाने की तैयारियां है।’
 यमुनानगर। साल की शुरूआत के सप्ताह भर बाद ही जहां मौसम की बदली छटा और हल्की-हल्की सर्द हवाओं का दौर शुरू हो जाता है, तो साथ ही इस मौसम में पंजाबी संस्कृति का रस घोलते हुए लोहड़ी पर्व का आगाज होता है। भले ही पंजाब से ट्विनसिटी की मीलो दूरी पर हो, किंतु पर्व को लेकर ट्विनसिटी में पंजाबी  संस्कृति का पूर्ण दर्शन कराने के लिए पूरी त्यारियां की जा चुकी है, जिसमें पंजाबी सभा समेत विभिन्न संगठनों की ओर इस पर्व को धूमधाम से मनाने की ठान ली है, तो अभी लोहड़ी के कई दिनों दूर होने पर भी स्कूल-कालेजों व संगठनों की ओर से इस पर्व को लेकर पंजाबी संस्कृति की झलक से लोगों को रूबरू कराने के लिए कई तरह के आयोजन किए जा रहे है।
पर्व के साथ जुड़ी ये गाथा
लोहड़ी पर्व के साथ जुड़ी मान्यता के मुताबिक एक गांव में दुल्ला नामक व्यक्ति था, जोकि बहुत गरीब था। फिर भी उसने एक लड़की को गोद लिया और जब उसकी शादी का समय आया तो उसके पास शादी के लिए कुछ न होने पर उसने लड़की की शादी के लिए गांव का गरीब था, उसने लड़की के विवाह के लिए गांव में इधर-उधर गांव वालों की मदद ली, जिस पर गांव के लोगों की मदद के बाद सब सामान जमा करने पर उसके द्वारा अपनी बेटी का विवाह धूम-धाम से मनाया गया। यहीं गाथा इस पर्व के लिए प्रचलित है,  इसी गाथा के बाद से यह पर्व बरसों से 13 जनवरी के दिन मनाया जाता आ रहा है।लोहड़ी पर्व पर सभी परिवार के लोग व कई स्थानों पर संगठनों की ओर से इस पर्व को मनाए जाने के लिए कुछ लक्कड़ियों व गोहे आदि को जमा कर देर शाम सबके एकजुट होने के बाद सर्वप्रथम लोहड़ी को मनाने के लिए जमा की गई सामग्री पर घी को अग्नि में अर्पित करते हुए पंजाबी लोक संस्कृति से जुडे गीतों को गाकर व इसी मौसम विशेष में खाए जाने वाले खाद्य सामग्री में मुंगफलियों, रेबड़ियों व फूलियाओं आदि को अग्नि में अर्पित कर शगुन किया जाता है।
पर्व मौसम की बदली छटा का करता स्वागत
पंजाबी संस्कृति के रस घोलता यह पर्व  से जुड़ी उक्त गाथा विशेष रूप से प्रचलित है, तो वहीं इस पर्व के लिए एक और मान्यता के मुताबिक यह पर्व मौसम में आए परिवर्तन का भी स्वागत करता है, विशेषता साल के पहले सप्ताह भर के उपरांत में मौसम से ठंडक कम होने लगती है और बसंत पंचमी तक मौसम में यूं ही बदली का दौर रहता है। मौसम के यूं बदले मिजाज को भी पर्व के साथ जोड़कर देखा जाता है।
पर्व में मिठास घोलती रेबड़ीलोहड़ी पर्व में जहां लोगों को पंजाबी संस्कृति की झलक दिखाई पड़ती है, तो साथ ही पर्व में रेबड़ी की मिठास भी पर्व में और अनंद का अनुभव कर देती है, बरसो से पर्व के साथ जुड़ी मान्यता है कि पर्व को मनाते समय यानि शाम के समय लोहड़ी के शगुन के रूप में तिल की रेबड़ियों व अन्य मिष्ठानों को अर्पित किया जाता है। इसके अलावा मूंगफलियों, फूलियों आदि का पर्व के दौरान सेवन किया जाता है।दाम आसमान पर फिर भी रौनक बरकरारपर्व पर खाए जाने पर रेबड़ियों, मूंगफलियों आदि खाद्य समाग्री के भले ही दाम आसमान को छू रहे हो, फिर भी बाजार में रौनक बरकरार है। अभी तीन-चार दिन शेष होने के बावजूद भी इन खाद्य सामानों की जमकर खरीदारी की जा रही है। 
बदले मौसम तो बदले-बदले अंदाज
मौसम के बदलने के साथ मनाया जाने वाला लोहड़ी पर्व को लेकर भले ही विभिन्न सभाओं व   संगठनों की ओर से इसे धूमधाम से मनाने की तैयारियां कर ली हो, किंतु प्राचीन समय में त्यौहार से जुडे किस्सें, बोलियां व लोकगीतों भूले से भी याद नहीं आ पाते। जिसका सबसे अधिक प्रभाव युवा पीढ़ी पर हुआ है, युवाओं के प्राचीन समय के पर्व को मनाने के तौर-तरीकों से अनभिज्ञ होने के चलते नए तरह से पर्व को मनाया जाने लगा है।
लोकगीत में अटक जाती है जुबां
इसे समय की मांग कहे या फिर आज के आधुनिकता के दौर के चलन का प्रभाव कहे कि जहां पर्व के दौरान गाए जाने वाले लोकगीतों को गाते समय आज भी परिजनों की ही जुबां अटकने लगती है, तो जिससे युवा पीढ़ी भी न केवल लोकगीतों से ही बल्कि पर्व को मनाने के तौर-तरीकों से भी अनभिज्ञ रह जाती है। तो दूसरी ओर वे पर्व को नए तौर-तरीके से मनाने में लगे है।
डीजे का चला चलनयूं तो प्रचीन समय में पर्व के साथ पंजाबी संस्कृति को दर्शाते लोक गीतों के अलावा लोक नृत्यों व नृत्य के रूप में विभिन्न बोलियों पर गिद्दा व भंगड़ा किए जाने का चलन था, किंतु आज डीजे पर थिरकने का अधिक चलन चल पड़ा है।ग्रिटींग कार्ड भी दिए जाने लगेन्यू ईयर की तर्ज पर लोहड़ी पर्व पर भी युवाआें में ग्रिटींग कार्ड देने का चलन खूब बढ़ चला है, जिसका अंदाजा शहर में दर्जनों कार्ड शौप पर हो रही इन कार्डो की बिक्री को देखकर लगाया जा सकता है। दुकानदारों की माने तो लोहड़ी संबंधित कार्ड 20 से शुरू होकर 150 रूपए व इससे अधिक कीमत में यदि लेना हो तो बडेÞ आकार में 150 से 250 रूपए के बीच भी कार्ड उपलब्ध है। दुकानदारों के अनुसार भले ही लोहडी पर्व के अभी दो-तीन दिन शेष है, फिर भी हर दिन 20 से 25 कार्ड बिक रहे हैबदला रवैया तो बदली सोच
अमुमन, लोहड़ी पर्व विशेषतौर पर किसी के विवाह के बाद बहु के परिवार में पहली दफा पर्व या फिर किसी के परिवार में बेटे के जन्म होने पर त्यौहार को धूम-धाम से मनाया जाता था, किंतु अब लड़कियों के लड़कों से कदम-दर-कदम मिलाने के दौर में सभी का लड़की के प्रति रवैया बदला है। यहीं कारण है कि लड़की बचाओं व अन्य कई तरह के ऐसे अभियानों को चलाए जा रहे है। जैसे-जैसे ये रवैया बदला तो लोहड़ी पर्व पर परिवार में बेटी के जन्म पर भी वैसा ही उत्साह देखा जाता है, जैसा बेटे के जन्म पर हो और बेटी के जन्म पर इस त्यौहार को धूमधाम से मनाया जाता है।
पर्व पर गए जाने वाले लोकगीत 
लोहड़ी पर्व पर गाए जाने वाले लोकगीतों में कई तरह के लोकगीत प्रचलित है, जिसमें लड़कियों व लड़कों के कई गीतों में विशेषतौर पर निम्न गीत विशेष रूप से गाए जाते है:-
Ñलोहडी पर लड़कियों के गीत
‘हुल्ले नी माये हुल्ले, दो बेरी पट्टे जुल्हे, दो जुल पाईयां खजूरियां। खजूरियां सटया मेवा, इस मुंडे दे घर मंग्वा, इस मुंडे दी वोटी निकली। हो कहंदी चोरी, कुटडी। कुट-कुट बराया थाल वोटी बावे नाना नल। ननद ते वडी परजाई। सो कुडमा दे घर आई! मैं लोहड़ी लेह आई’
लोहड़ी पर लड़कों के लिए गीत
‘सुंदर-मुंदरीए हो! तेरा कौन विचारा हो! दुल्हा वाटी वाला हो! दुल्हे दी दीह विहाई हो! शेर शक्कर पाई हो! कुड़ी दा लाल पटाखा हो! कुड़ी दा सालू पट्टा हो। साले कौन समते! चाचे चोरी कुट्टी! जमीदारां लुट्टी! जमींदारा सुदाए! बड़े बोले आए! एक बोला रह गया! सिपाही पकड़ के ले गया! सिपाही ने मेरी ईट! सानू दे-दे लोहड़ी ते तेरी जीवे जोड़ी! पैनें रो ते पांवे पीट’
पर्व के लिए विशेष लोहड़ी संगीत
‘मुक्की दा दाना, आना ले के जाना..., हुल्ले हुलारे, अस्सी गंगा चल्ले, सास-सोरा चल्ले। जेठ-जेठानी चल्ले। दयोर-दरानी चल्ले, पैरी शौकां  चल्ली। हुल्ले हुलारे। अस्सी गंगा पहुंचे सास-सोरा पहुंचे। जेठ-जेठानी पहुंचे। दयोर-दरानी पहुंचे, पैरी शौकां पहुंची, हुल्ले-हुलारे। अस्सी गंगा नाते शावा और हुल्ले, जेठ-जेठानी नाते, दयोर-दरानी नाते। पैरी शौकां नाती। हुल्ले-हुलारे। शौकां पेल्ली पौड़ी शौकां दुजी पौड़ी। शौकां तीजी पौड़ी। मिट्ठी धाखां दीत्ता, शौकां वीच रूढ गई, हुल्ले-हुलारे। सास-सोरा रौण, जेठ-जठानी रोण, दयोर-दरानी रौण, पैरा ओवी रोवे। मैं क्या तुस्सी क्यों रौंदे ओ, तुवाड़े जोग्गी मैं बथेरी, मैनू दयो बधांइयां जी। हुल्ले-हुलारे’

लोहड़ी पर्व को लेकर शहरवासियों में उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी पर्व के लिए तीन दिन शेष है फिर भी पंजाबी सभा की ओर से रविवार को लोहड़ी पर्व को धूमधाम से मनाते हुए डीएवी स्कूल में एक लोहड़ी मेला आयोजित किया गया। देर शाम को शुरू हुए इस मेले में पंजाबी संस्कृति की पूर्ण झलक दिखाई पड़ी, जिसमें सैकड़ो की संख्या में लोगों ने शामिल होकर लोहड़ी पर्व को मनाया।
पंजाबी सभा के तत्वावधान में आयाजित हुए इस लोहड़ी मेले का शुभारंभ डा. ईश चढ्ढा ने किया।  पर्व में पंजाबी संस्कृति से रूबरू कराने के लिए भंगड़ा, गिद्दा व अन्य लोकगीतों को गाकर व लोहड़ी में मूंगफलियों व रेबड़ियों आदि के शगुन के उपरांत देर रात तक पर्व को धूमधाम से मनाया गया।
कलाकारों ने खूब जमाई महफील
सभा की ओर से आयोजित लोहड़ी मेला में श्रीगणेश इंटरप्राईजर्स के  सौजन्य से आयोजित रंगारंग कार्यक्रमों में हास्य कलाकार जूनियर जसपाल भटी, जूनियर गुरदासमान, गिद्दा और भांगड़ा टीम ने दर्शकों का खूब मनमौहा। वहीं इस अवसर पर जहां शहर से सैकड़ो की संख्या में लोग शमिल हुए तो पंजाबी सभा के महासचिव हरीश कोहली, प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य देवेंद्र चावला, आदि सभा के सभी सदस्य भी मौजूद थे।

Monday, 23 January 2012

माइनिग कर रहे लोगों ने पुलिस पर हमला CITY NEWS YNR


 माइनिग कर रहे लोगों ने पुलिस किया  हमला
 यमुनानगर जिले के कस्बा खिजराबाद के ताजेवाला इलाके में अवैध रूप से चल रही माइनिग पर रोक लगाने के लिए गश्त कर रही पुलिस पार्टी पर माइनिग तस्करों ने हमला कर दिया अचानक हुई पत्थर बाजी में एसएचओ घायल हो गए तो वही जवाबी कार्रवई में कई तस्करों के भी चोटे आई है पुलिस की कार्रवई को देख तस्कर वहा से भाग निकले लेकिन पुलिस ने आठ माइनिग तस्करों को काबू कर लिया और उनके कब्जे से दो एक जेसीबी मशीन दो डंफर व कई गाडियों को कब्जे में ले लिया है वही तस्करों के खिलाफ पुलिस ने एक दर्जन के करीब धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया एक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब हरियाणा व उत्त्र प्रदेश की और से माइनिग पर रोक लगाने के लिए दोनों तरफ के प्रशासन जुट गए है और ऐसे में दोनों ही प्रदेशों की और से तस्करों पर काूब पाया जा रहा है जिससे बोखलाहट में आज यमुनानगर के खिजराबाद इलाके में जब पुलिस पार्टी गश्त कर रही थी तो बौखलाहट मतें आ कर अवैध माइनिग कर रहे लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया आनन फानन में पुलिस को वहा से भाग कर अपनी जान बचानी पडी लेकिन पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाकर जब घटना स्थल पर पहुंचरी तो दुबारा से अवैध माइनिग करने वाले तस्करो ंने पुलिस पर पत्थरो ंसे धावा बोल दिया जिससे मौके पर खिजराबाद थाना प्रभरी घायल हो गए पुलिस ने भी तस्करों को काबू करने के लिए बल प्रयोग करते हुए उन्हें काबू करने की कोशिश की काफी मुश्क्त के बाद पुलिस आठ लोगों को काबू कर पाई पत्थर बाजी में जहा पुलिस थाना प्रभारी घायल हो गए तो वही जवाबी कार्रवई में तस्करों को भी चोटों आई फिल्हाल पकडे गए सभी तस्करों को पुलिस ने सीआईए स्टाफ में लाकर उनसे पूछताछ कर इन लोगों के खिलाफ मारपीट जान से मारने की कोशिश धोखाधडी आन डयूटी पुलिस पर जान लेवा हमले सहित लगभग एक दर्जन के करीब धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है
दो पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में भी पेष किया वही पुलिस ने अवैध माइनिग कर रहे तस्करों के कब्जे से एक जेसीबी मशीन दो डंफर एक सकोरपियों सहित कई वाहनों को भी अपने कब्जे में ले लिया पुलिस का कहना है कि घटना के समय कई और भी वाहन व जेसीबी मशीने थी जिन्हें तस्कर वहा से भगा ले जाने में कामयाब रहे फिल्हाल पुलिस की पक डमें आए आठ तस्करों से पुलिस को काफी उम्मीदे है कि इनक ेपीछे कौन कौन लोग है जो अवैध माइनिग के धंधे में जुडे हुए है जिनके बारे में इन लोगो ंसे ख्ुालासा हो सकता है 
बाइट जांच अधिकारी हरबंस लाल