Friday, 4 May 2012

शब्दों का जाल चला रहे फास CITY NEWS YNR



                शब्दों का जाल चला रहे फास


                      भले भाले लोगों को फांस रहे हैं तांत्रिक
                      जादू-टोने के नाम पर ऐंठते हैं मोटे पैसे

विनोद धीमान
जगाधरी वर्कशाप। शमां तूफानों में जल सकती हैं, कश्ती भावर से निकल सकती है, मायूस न हो, दुआ भी  तकदीर बदल सकती है, चैलेंज देने वालों से सावधान, खुदा नहीं वह है इंसान, मेरे पास आपकी हर समस्या का समाधान, खुदा ने चाहा तो आपको खून के आंसू रोने नहीं दूंगा, 101 परसेंट गारंटी के साथ आपकी हर समस्या का समाधान करूगा, सबको आजमाया बार-बार मुझे आजमाओं एक बार, हर-एक दुख भलांएगे, मंजिल तक पहुंचाएंगे, माई प्रोमिस  11 मिन्टों में 101 फीसदी समाधान, खतरनाक समस्याओं का तूफानी समाधान, जैसा चाहोगे, वैसा पाओगे, हमसे पहले काम करने वाले को मुंह मांगा ईनाम, माई प्रोमिस प्यार टूटने नही दूंगा, आपकी हर मुश्किल दूर कर दूंगा, जी हां, यही वह जुमले हैं। जिनकी बदोलत तंत्र मंत्र व काले जादू का खौफ दिखा तांत्रिक प्यार मुहब्बत में कामयाबी से लेकर दुश्मन को ठिकाने लगाने जैसी समस्याओं को चुटकियों  में हल करने का दावा कर आम लोगों को अपने जाल में फांस लेते हं। कोई 11 घंटे तो कोई 72 घंटे में समाधान का दावा करता है, तो कोई काम की 100 फीसदी गारंटी देता है। खुद को रूहानी ईल्म, बंगाली जादू, तांत्रिक सिद्ध शक्तियों, खतरनाक रूहानी ताकतों आदि का बेताज बादशाह बताकर लोगों को इस कदर भरमित किया जाता है कि वह प्रभवित होकर इनके पास पहुंचता है और फिर 101 से 501 रूपए तक की कंसल्टेशन फीस लेने के बाद परेशान व्यक्ति को इस कदर फांसा जाता है, कि वह इन तात्रिकों के चंगुल से कभी  निकल ही नहीं पाता। यही नहीं तंत्र शक्तियों में कोई 30 वर्ष का तो कोई 40 वर्ष का अनुभव बताता है। कोई 72 घंटे, कोई 21 घंटे तो कोई एक घंटे में हर समस्या के हल का दावा करता है। कुल मिलाकर कोशिश बस शिकार फांसने की होती है। इसी वजह से परेशान व्यक्ति आसानी से तांत्रिक के चुंगल में फंस जाता है। शब्दों के भरमजाल का यह पाशा इस तरह से फेंका जाता है कि एक बार इनके मोहपाश में फंस गया, फिर सारी जमा-पंजी लुटाने के बाद ही उसे होश आता है।
मजेदार बात यह है कि हर तांत्रिक अपने विज्ञापनों और होड़िग में फ्री सेवा का दावा करता है। फीस नहीं, ईनाम लूंगा, फ्री सेवा, फ्री सेवा, कहकर शब्दों के जाल में परेशान व्यक्ति को अपनी तरफ खिंचा जाता है और जब यह तांत्रिकों के पास पहुंचता है तो फिर शुरूआत में छोटी-मोटी फीस लेने के बाद उसे तरह-तरह से डराकर काली कमाई की दुनिया में फांस लिया जाता है।
समाधान का दावा
झूठ व लालच की बुनियाद पर खड़े तंत्र-मंत्र के लिए संसार में ये तांत्रिक अपने गौरख धंधे को चमका काली कमाई के लिए सरकारी नौकारी, कारोबार, पति-पत्नी में अनबन, विदेश यात्रा में रुकावट, संतान प्राप्ति या संतान पैदा होकर मर जाना, दुश्मन व सौतन से छुटकारा, घर में खून के छिंटे आना, खिलाया-पिलाया, जादू- टोना, मनचाहा वशीकरण यानी किसी को भी वश में करना, बीमारी में दवा का न लगना, कोर्ट-कचहरी के मामले, ड़रावने सपने आना, कपडें कटना, लव मैरिज, प्यार में धोखा, फसल को नुकसान पहुंचना जैसी कई समस्याओं का चुटकियों में हल करने का दावा करते हं। दूसरों की परेशानी हल हो न हो लेकिन तांत्रिक जेबें भरकर अपनी समस्या जरूर हल कर लेते हैं। हालांकि शहर से इस प्रकार के किसी तांत्रिक का प्रचार नहीं हो रहा, लेकिन पड़ोसी जिले के कुछ तांत्रिक जिले में पर्चें बांटकर इसी प्रकार का प्रचार कर रहे हैं।
बॉक्स
ऐसे तांत्रिकों के खिलाफ प्रशासन भी  आंखें बंद करके बैठा है जिस विभाग को इसके ऊपर कार्रवाई करनी चाहिए वह भी  अपनी जिम्मेदारी से या तो मुंह मोड़ता है या फिर शिकायत मिलने की बात करता है। ऐसे में शिकायत कर्ता न मिलने के चलते विभाग तो अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है परंतु कहीं न कहीं ये तांत्रिक लोगों को गुमराह कर अपनी जेबें भरने पर लगे हैं। ऐसे में प्रशासन को भी  अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए या तो लोगों को जागरूक करना चाहिए या फिर तांत्रिकों पर लगाम कसनी चाहिए।

जागरूक होने की जरूरत
पंडित उदयवीर शास्त्री के अनुसार यह हमारी दैवीय शक्तियों का अपमान है। ऐसे लोग परेशान लोगों को भरमित कर लूट खसोट का काम करते हैं। ऐसे में परेशान आदमी और दिक्कतों में फंस जाता है। लोगों को ऐसे पाखंड़ियों से जागरूक होने की जरूरत है।




लूट खसोट के उद्देश्य से करते हैं ये काम
लक्ष्मी नगर निवासी पुनीत कुमार का कहना है कि ऐसे लोग पहले तो किसी न किसी जरिए से आदमी को अपने चुंगल में लेते हैं और बाद में उससे लूट खसोट की नीति अपनाते हैं। साइंस के जरिए कुछ चमत्कार दिखाकर लोगों को भरमित कर उनसे गलत कार्य करा अपनी जेबों को भरते हैं परंतु परेशान आदमी का कोई भला नहीं करते इसलिए हमें खुद जागरूक होकर ऐसे लोगों से बचना चाहिए।

Tuesday, 1 May 2012

रासलीला में दिखाया प्रभु-भक्त प्रेम CITY NEWS YNR


           रासलीला में दिखाया प्रभु-भक्त प्रेम
   जगाधरी वर्कशाप। श्री राधा कृष्ण सखा मंडल द्वारा पुराना राधा स्वामी सत्संग भवन विष्णुनगर में करवाई जा रही रासलीला के तीसरे दिन श्री भक्तिमयी मीरा चरित्र का मंचन किया गया। जिसमें रासाचार्य व पद्मश्री स्वामी राम स्वरूप शर्मा ने परंपरागत ढंग से रासलीला का मंचन करवाया। आज के मंचन में श्री कृष्ण द्वारा गिरधर पर्वत को उंगली पर उठाना, भक्तिमयी मीरा के प्रभू के प्रति प्रेम और उसकी ननद उधा का हृदय परिर्वतन दिखाया गया। कंस के अत्याचारों के बढ़ने के साथ ही जब कंस ने गोकुल की तरफ अपना रुख किया तो श्री कृष्ण ने गोकुल वासियों की रक्षा करने का प्रण लिया। श्री कृष्ण गोकुल वासियों से कहते हैं कि इंद्र देवता का धर्म है

कि वे वर्षा करें और धरा को तृप्त करें। आप इसकपूजा क्यों करते हैं। पूजा ही करनी है तो श्री गोवर्धन की करें। इससे इंद्रदेव नाराज हो जाते हैं और अपनी वर्षा का प्रहार नंद गांव पर करते हैं। वर्षा इतनी अधिक होती है कि पूरे गांव में पानी भर जाता है। इंद्र देव के प्रकोप से बचाने के लिए श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लेते हैं और सभी गांव वाले पर्वत के नीचे आकर अपनी जान बचाते हैं और इंद्र देव का अभिमान टूट जाता है। मीरा पूर्व जन्म में कृष्ण जी की एक गोपी थी। उनका विवाह कृष्ण के एक सखा के साथ सम्पन्न हुआ। वह गोपी नंद गांव जाने लगी तो उसकी मां ने कहा कि तू कृष्ण का मुख मत देखना क्योंकि जो भी उसका मुख देखता है वह उसके पीछे पागल हो जाता है। गोपी मां की बात मान कृष्ण को अपना मुख नहीं दिखाती है। कृष्ण कहते हैं कि एक दिन ऐसा आएगा जब तू स्वयं मेरा मुख देखने आएगी। ऐसा ही हुआ जब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया तो वह समझ गई कि वह प्रभू ही हैं और वह प्रभू से माफी मांगती है और प्रभू का आर्शिवाद लेती है। प्रभू ने आर्शिवाद दिया कि कलयुग में तू मीरा के नाम से जन्म लेगी मै तूझे गिरधर गोपाल के रूप मेें मिलूंगा। मीरा का जन्म राजस्थान के मेड़वा गांव में हुआ और उनका विवाह चित्तौड़ मेें राणा भोजराज के साथ हुआ। लेकिन मीरा तो कहती मेरो तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई। पति के स्वर्गवास के बाद गद्दी पर राणा विक्रम बैठे जिन्होंने मीरा को सताना शुरु कर दिया। उनके गोपाल की चोरी कराइ पिटारे में सांप भेजा विष का प्याला पिलाया। परंतु भगवान ने मीरा की रक्षा की। अंत में मीरा वृंदावन आई और बांके बिहारी का दर्शन किया। स्वामी राम स्वरूप ने सभी भक्तों से आग्रह किया कि मौका मिले तो वृंदावन जरूर आएं और भगवान के दर्शन जरूर करें।
 पुराने राधा स्वामी सत्संग घर में जारी रासलीला में चौथे दिन द्रोपदी के चीरहरण की कथा का मंचन किया गया। चीरहरण कथा का बखान करते हुए कथा वाचक रासाचार्य व पद्म श्री स्वामी राम स्वरुप शर्मा ने उपस्थित श्रद्धालुओं खूब भाव विभौर किया। इस दौरान भक्तजन  भजनों से मंत्रमुग्ध हो गए। रासलीला में द्रोपदी चिर हरण कथा के मंचन के दौरान उन्होंने बताया कि मकर सक्रांति के पर्व पर रानी द्रोपदी गंगा स्नान करने संगम तट पर गई थी। उसी तट पर दुर्वासा ऋषि भी स्नान कर रहे थे। अचानक दुर्वासा ऋषि का अंग वस्त्र पानी में बह गया। इसी दौरान रानी द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर ऋषि को दी।  इस घटना को देखते हुए दुर्वासा ऋषि के मुख से सहज ही यह शब्द निकल आए कि जैसे तूने मेरी लाज बचाई हैं, उसी प्रकार ईश्वर तेरी लाज बचाएंगे। कथा वाचक ने कहा कि ऐसी ही घटना उस समय घटी जब शिशुपाल ने अपनी हद पार करते हुए भगवान श्री कृष्ण को सो गालियां दे डाली। इस पर भगवान श्री कृष्ण ने सुर्दशन चक्र शिशुपाल का वध करने के लिए छोड़ा तो ध्यान भंग होने के कारण चक्र से श्री कृष्ण की अंगुली भी कट गई। अंगुली कटने से उसमें से रक्त बहने लगा। यह देखते ही द्रोपदी एक क्षण में अपनी साड़ी फाड़कर कृष्ण जी की अंगुली पर बांध देती हैं। इससे खुश होकर श्री कृष्ण द्रोपदी को कहते हैं, हे द्रोपदी समय आने पर मैं तुम्हारे लिए वस्त्रों के ढ़ेर लगा दूंगा। जब दुष्शासन द्रोपदी को केश से घसीटता हुआ भरी सभा में ले गया और वहां द्रोपदी की साड़ी उतारनी चाहिए तो, किसी को अपना सहायक न पाकर द्रोपदी श्री कृष्ण को पुकारती है। भगवान श्री कृष्ण वहां साड़ी को इतना बढ़ा देते हैं कि दुष्शासन थक जाता है।







                              

जगाधरी वर्कशाप। श्री राधा कृष्ण सखा मण्डल वर्कशाप द्वारा करवाई जा रहे रासलीला में शुक्रवार को भीष्म प्रतीज्ञा व प्रभू की चार भक्तों पर कृपा का दृष्य दिखाया गया। इससे पहले राजसू यज्ञ में भगवान सभी को अलग अलग सेवा देते हैं और अपने आप सभी के जूठे पत्तल उठाने व सभी के पांच धुलवाने का काम लेते हैं। जुएं में सारा राजपाठ हार जाने के बाद व दुर्योधन द्वारा द्रोपदी को अपनी जंघा पर बैठने को कहने के बाद भीम प्रतिज्ञा करते हैं कि गदा से इन्हीं जंघाओं को तोडूंगा। उधर, द्रोपदी प्रतिज्ञा करती है कि दुशासन के रक्त से जब तक अपने केश नहीं धोती वो केश खुले ही रखेगी। भगवान श्री कृष्ण पांडवों के शांति दूत बनकर दुर्योधन को समझाने के लिए प्रस्थान करते हैं। द्रोपदी श्री कृष्ण को अपनी प्रतिज्ञा याद दिलाती है। श्री कृष्ण दुर्योधन के स्वागत सत्कार को ठुकराकर विदूरानी के घर जाते हैं। विदुरानी को श्री कृष्ण कहते हैं कि उन्हें भूख लगी है कुछ खाने को दो। विदूरानी उन्हें केला खिलाती है। विदुरानी प्रभू के प्रेम में यह भूल जाती है कि वह प्रभू को केले का छिल्का ही खिला रही है और प्रभू खाते जा रहे हैं। प्रभू कहते हैं कि वह भाव के भूखे हैं प्रेम के भूखे हैं वस्तु के नहीं। प्रभु को प्रेम से भक्त जो भी अर्पण करते हैं वह स्वीकार कर लेते हैं। उधर दुर्योधन श्री कृष्ण की बात नहीं मानता और युद्ध होना तय हो जाता है। अर्जुन और दुर्योधन दोनो ही सहायता मांगने श्री कृष्ण के पास जाते हैं। दुर्योधन प्रभु से सेना मांगता है और अर्जुन प्रभु को ही मांग लेता है। रसाचार्य स्वामी श्री राम स्वरूप शर्मा ने भक्तों से कहा कि जिसके साथ प्रभु हैं उसे किसी प्रकार की सेना या किसी हथियार की अवश्यक्ता नहीं होती। युद्ध में नित्य पांडवों की जीत को देखकर दुर्योधन घबरा जाता है। वह पितामह भीष्म के पास जाता है और उन्हें उत्तेजित कर देता है। भीष्म प्रतिज्ञा करते हैं कि वह कृष्ण से हथियार उठवा देंगे नहीं तो पांडवों को मार देंगे। यह सुनकर पांडव निश्चित मान लेते हैं कि कल पितामह हमें मार डालेंगे। श्री कृष्ण द्रोपदी को लेकर रात्री के समय उनके शिविर में पहुंच जाते हैं। द्रोपदी उन्हें प्रणाम करती र्है। पितामह द्रौपदी को दुर्योधन की पत्नी समझ अखण्ड सौभाग्य वती होने का आर्शिवाद दे देते हैं। जब पितामह को पता चलता है कि यह द्रौपदी है तो वह श्री कृष्ण के चरणों में प्रार्थना करते हैं कि मेरी लाज अब आपके हाथ में है। श्री कृष्ण पितामह की प्रतिज्ञा को पूरा कराने के लिए अपनी प्रतिज्ञा तोड़ देते हैं।










  रासलीला ने रच दी अनौखी गाथा 
श्रीकृष्ण लीला के साथ हुआ सीता स्वंयवर का मंचन

 प्राचीन समय से भगवान श्रीकृष्ण विभिन्न रुपों का मंचन करती आई रासलीला ने अनौखी गाथा रच दी। बात जगाधरी वर्कशाप में श्रीराधा-कृष्ण मंडल के तत्वावधान में पिछले सप्ताह-भर से आयोजित की जा रही रासलीला की है। जहां शनिवार को पहली बार कुछ यूं हुआ कि मंच  कलाकारों द्वारा श्रीकृष्ण लीला के साथ रामायण के सीता स्वंयवर का मंचन भी किया गया। एक ही मंच पर भगवान श्रीकृष्ण की लीला व श्रीराम की महिमा का मंचन होता देखकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभौर हुए। वहीं, सभी ने रासलीला के मंच पर रामायण का मंचन किए जाने की खूब प्रशंसा की।
शनिवार को मंडल के मंच कलाकारों के माध्यम से श्रीकृष्ण भगवान की लीला दिखाने उपरांत रामायण में हुए सीता स्वंयवर का भव्य मंचन किया गया। सीता स्वंयवर के लिए राजा जनक गुरु सततानंद को राम-लक्ष्मण सहित मुनि विश्वामित्र को बुलाते है। इस निमंत्रण पर श्रीराम-लक्ष्मण के नगर में आगमन पर नगर के सभी निवासी उनके दर्शनों के लिए उमड़ने लगते है। नगर में जैसे ही भगवान श्रीराम-लक्ष्मण प्रवेश करते है, वैसे ही नगरवासियों में उनके भव्य रुप को देखने के लिए होड़ मचने लगती है। मंच के माध्यम से बताया गया कि भगवान भक्तों की भावना अनुसार ही उन्हें दर्शन देते है। सीता स्वंयवर के लिए सभा में दस हजार राजा तथा रावण वाणासुर भी आते है। बारी-बारी सभी राजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, किंतु किसी से भी धनुष को उठाया न जा सका। यह देखकर जनक महाराज व्याकुल हो उठे और कहने लगे कि क्या इस पृथ्वी पर कोई भी वीर नहीं है, जो इस धनुष को तोड़ सके। यह सुनकर सभा में मौजूद लक्ष्मण क्रोधित हो उठते है और कहते है कि इस धनुष को वह सारे ब्रह्माण्ड में उठाकर कच्चे घडेÞ के समान फोड़ सकते है। उसी वक्त लक्ष्मण को समझाकर मुनि विश्वामित्र श्रीराम को धनुष तोड़ने की आज्ञा देते है। इस पर श्रीराम ने गुरु को प्रणाम कर धनुष समीप जाते है और धनुष समक्ष हाथ जोड़कर प्रार्थना करते है। इसके बाद श्रीराम धनुष को उठाकर उसके दोनों सिरों पर कमाल बांधकर देखते ही देखते धनुष तोड़ देते है। श्रीराम द्वारा धनुष तोड़ दिए जाने पर गुरु सतानंद की आज्ञा से सीता श्रीराम को जयमाला पहनाती है और राज जानकी का विवाह सम्पन्न होता है।
पांच कन्याओं का विवाह करवाया
श्रीराधा-कृष्ण मंडल की ओर से रासलीला में शनिवार को रासलीला के दौरान सीता स्वयंवर का मंचन किए जाने के साथ ही पांच कन्याओं का विवाह भी सम्पन्न करवाया गया। इस आयोजन पर मुख्यातिथि के रुप में गणेश गुप्ता, मदन मोहन अरोड़ा व दर्शन लाल जगोता शामिल रहे। जिनके सहयोग से ससौली माजरी की रजनी का विवाह अमादलपुर के  सुनील कुमार, गांव विलपुर की सुमन का विवाह गांव गादीपूर बिटू, अम्बेडकर विहार की कुसम का विवाह गांव बाड़ीमाजरा के राजेश कुमार, लाजपत नगर की शालू का विवाह जोगिंद्र नगर के राजन और गांव ससौली की राजबाला का विवाह रिंकू के साथ हुआ।












फूलों की होली के साथ हुआ रासलीला का समापन CITY NEWS YNR



  फूलों की होली के साथ हुआ रासलीला का समापन
होली खेलने के लिए दिल्ली से मंगवाएं गए थे फूल

जगाधरी वर्कशाप। श्री राधा कृष्ण सखा मण्डल द्वारा आयोजित रासलीला की समाप्ति पर •ाव्य ब्रज की होली खेली गई, जिसमें स•ाी नगर वासियों ने होली का •ारपूर आनंद उठाया। होली फूलों से खेली गई। आज के कार्यक्रम में मुख्य यजमान सुरेंद्र घई और रजिंद्र मोदी व सरदार हरजीत सिंह रहे। रसाचार्य व पद्मश्री स्वामी राम स्वरूप ने ब्रज की होली के बारे में विस्तार से स•ाी को बताया। उन्होंने मंच पर दिखाया कि ब्रज की होली स•ाी का अलग ही आनंद है। पंडाल •ारा फूलों सेफूलों की होली खेलने के लिए गुलाब व चमेली के फूल दिल्ली से मंगवाए गए थे। सबसे पहले ब्रज में परंपारिक लट्ठमार होली का दिखाई गई। इसमें दिखाया गया कि श्री कृष्ण अपने सखाओं के साथ व गोपियों के साथ लठमार होली खेलते थे। उसके बाद श्री कृष्ण व राधा जी पर फूलों की वर्षा की गई। फिर फूलों की वर्षा स•ाी •ाक्तों पर की गई। स•ाी •ाक्त मंच पर इस प्रकार की होली को देख रोमांचित हो रहे थे। स•ाी का कहना था कि अगले वर्ष फिर इसी प्रकार की होली कइंतजाररहेगा।
माथा टेक लिया आर्शिवाद
कार्यक्रम की समाप्ति पर स•ाी •ाक्तों ने राधा कृष्ण के चरणों को स्पर्श कर आर्शिवाद लिया। •ाक्तों की टोली मंच पर आने के लिए व्याकुल हो उठी। स•ाी ने श्री कृष्ण व राधा जी से प्रार्थना की वे अगले वर्ष •ाी इसी प्रकार से यहां आएं और स•ाी को इसी प्रकार से रासलीला व ब्रज की होली के दर्शन कराएं।नई पीढ़ी समझे •ागवान के •ाावइस मौके पर रासाचार्य व पद्मश्री स्वामी राम स्वरूप शर्मा ने स•ाी •ाक्तों से आग्रह किया कि वे रासलीला में •ागवान के •ााव को समझें और अपने जीवन में उसे अपनाएं। महाराज जी ने कहा कि नई पीढ़ी •ागवान को •ाूलती जा रही है। कुछ चलचित्र ने •ाी इस पर प्र•ााव डाला है कि लोग टीवी देखकर ही गुजारा कर लेते हैं। पहले के समय में किस प्रकार रासलीलाएं होती थी। अब उस प्रकार का समय नहीं रहा। महाराज जी ने बताया कि रासलीला करवाना आसान काम नहीं है। इसमें •ााग लेने वाले पात्र ऐसे हैं जिन्हेंं इसी का सहारा है। कुछ ऐसे हैं जो इसके साथ अपनी पढ़ाई •ाी कर रहे हैं। •ाक्तों को चाहिए कि इन स•ाी का सहयोग करें ताकि •ागवान की लीला का मंचन इसी प्रकार चलता रहे।  









Saturday, 21 April 2012

कैंसर पर निकली जागरूकता रैली CITY NEWS YNR



          गलत खान-पान से कम हो रही रोग प्रतिरोधक क्षमता
                                         कैंसर पर निकली जागरूकता रैली

यमुनानगर। जमना आटो इंडस्ट्रीज तथा खालसा शिक्षण संस्थाओं के द्वारा रोको कैंसर ट्रस्ट इंडिया तथा एमकेसी ट्रस्ट लंदन के सौजन्य से मैगा मेडिकल कैंप तथा कैंसर जागरूकता रैली का आयोजन  किया गया। कैंसर जागरूकता रैली को  राज्य सूचना आयुक्त उर्वशी गुलाटी ने हरी झंडी देकर रवाना किया। यह रैली गुरू नानक खालसा कॉलेज से प्रारंभ से होकर मॉडल कॉलोनी, प्यारा चौक, नेहरू पार्क, जब्बी वाला गुरूद्वारा, सरनी चौक, वर्कशॉप रोड, फ व्वारा चौक होते हुए  खालसा कॉलेज में वापस पहुंची। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिन्दगी और गलत खानपान के चलते जहां लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही है। वहीं वह अनेक प्रकार की जटिल बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, जिसके बारे में लोगों को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कैंसर की घातकता और व्यापकता से मानव समाज काफी भयभीत है। इस रोग की गंभीरता के साथ इस रोग के विषय में जन-मानस में पर्याप्त जानकारी का आभाव भी इस रोग को और अधिक विकराल बनाए हुए है। परंतु लोगों को समय रहते इस संबंध में जागरूक करके इस बीमारी से निजात दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मधुमेह, हद्य रोग, टीवी, एड्स तथा कैंसर जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए अनेक प्रकार के कार्यक्र म चलाए जा रहे हैं जिसका लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होनें डॉक्टरों, समाजसेवी संस्थाओं,  सरकारी व निजी अस्पतालों, शिक्षण संस्थाओं के अतिरिक्त रेड़ियो, टीवी और मीडिया से जुडे कर्मियों से आहवान् किया कि वह लोगों को कैंसर जैसी भयानक बीमारियों से निजात पाने के तौर-तरीकों के बारे में जागरूक करने में सरकार की मदद करें। उन्होनें बताया कि मुंह, गले और ग्रीवा के 40 प्रतिशत कैंसर के रोगियों का मुख्य कारण बीड़ी-सिगरेट, तम्बाकू  और गुटखा का प्रयोग करना पाया गया है। उन्होनें उपस्थित लोगों से आहवान् किया कि वह जीवन में फ ास्ट-फू ड का त्याग करते हुए सादा भोजन करें और सक्रिय जिन्दगी व्यतीत करते हुए समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य की जांच करवाते रहें। जिससे वह अपने जीवन में आने वाली गम्भीर बीमारियों से अपना बचाव कर सकते हैं।   
खालसा शिक्षण संस्थाओं के चेयरमैन स. भूपेन्द्र सिंह जौहर ने कॉलेज के प्रांगण में आए मुख्य अतिथि, डॉक्टरों तथा अन्य गणमान्य नागरिकों का स्वागत करते हुए कहा कि रोको कैंसर लंदन की एक प्रसिद्ध समाजसेवी संस्था है जिसे अजिन्द्र पाल सिंह चावला ने अपनी पत्नी जिनका देहान्त कैंसर के कारण हुआ था की याद में  स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वह इस संस्था के माध्यम से लोगों को इस रोग से मुक्त करने के लिए प्रयासरत हैं।
रोको कैंसर ट्रस्ट चंडीगढ़ की निदेशिका मनजीत कौर ने कहा कि  विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंर्तराष्टÑीय कैंसर रिर्सच संस्थान से प्राप्त आंकडों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार महिलाएं स्तन कैंसर के रोग से ग्रस्त हो रही है और अज्ञानतावश इनमें से आधी संख्या में महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। उन्होंने बताया कि रोको कैंसर चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से भारत में अब तक 17 राज्यों में दो लाख महिलाओं का स्वास्थ्य चैकअप किया गया और 28 हजार महिलाओं के ब्रेस्ट कैं सर हेतु मैमोग्रामस किए गए है जिनमें से 1200 महिलाएं स्तन कैंसर के ग्रस्त पाई है और 4800 महिलाओं को गहनतम टेस्ट करवाने की सलाह दी गई है। कार्यक्रम में कैंसर विषय पर स्लोगन लेखन के विजेता विद्यार्थियों जिनमें रविन्द्र सिंह को प्रथम पुरस्कार, कुमारी वैशाली को द्वितिय, कुमारी निकिता आन्नद को तृतीय पुरस्कार तथा सौरव, अरूण कुमार, मनिन्द्र कौर को  उत्साहवर्धन पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। मौके पर रोको कैंसर चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा मुख्य अतिथि, खालसा शिक्षण संस्थानों के अध्यक्ष, अन्य पदाधिकारी व प्राचार्या को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर  रोटरी कल्ब यमुनानगर रिवेरो के अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, कॉलेज प्रबंधक समिति के सदस्य, निदेशक डॉ. महेन्द्र सिंह, सुधा मुरगई, डॉ. नम्रता, डॉ. शुभम, रेडियोंग्राफ र देवेन्द्र, रोको ट्रस्ट के कार्यक र्ता कुलजीत, प्रेमलत्ता, मनजीत कौर, अमरजोत कौर, मोहित, सूरज तथा गुलजार सिंह उपस्थित थे।




Thursday, 12 April 2012

विदाई समारोह का आयोजन CITY NEWS YNR


विदाई समारोह का आयोजन 

यमुनानगर। डीएवी गर्ल्स कालेज में वीरवार को सीनियर्स के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसकी थीम महफिल मुटियारां दी रही। इस दौरान छात्राओं ने पंजाबी गीतों पर जमकर ठुमके लगाएं। समारोह में पारूल ढिंगरा को मिस फेयरवेल तथा अंकिता को मिस ईव के खिताब से नवाजा गया। जबकि बीए मॉस कम्यूनिकेशन अंतिम वर्ष की छात्रा सवि मग्गो को मिस आॅलराउंडर का खिताब मिला। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया तथा सीनियर्स के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
डा. सुषमा आर्य ने कहा कि छात्राओं ने राष्टÑीय व अंतर्राष्टÑीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर तथा पदक जीतकर डीएवी गर्ल्स कालेज का नाम भारत ही नहीं, अपितु, विश्व स्तर पर चमकाया है। जिन छात्राओं ने कालेज में तीन साल या फिर पांच साल तक पढ़ाई की है, उनके सम्मान में विदाई समारोह का आयोजन किया गया है। उन्होंने छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और परीक्षा में अच्छे मॉर्क्स प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया। विदाई समारोह के दौरान प्रीति ने डोला रे डोला गीत पर डांस कर समां बांध दिया। वहीं शीतल ने मेरा झुमका उठाके लाया यार वे, आजा नच ले गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर पंडाल में माधुरी दीक्षित के डांस की यादों को ताजा कर दिया। देसी गर्ल्स मिताली, सुप्रिया, दीपिका, मानसी, रीना ने रॉक प्रस्तुत कर पंडाल में बैठी सभी छात्राओं को नाचने के लिए मजबूर कर दिया। कैटवॉक में सवि मग्गो, कृति शर्मा, रीना, सर्वजीत कौर, पारूल ढिंगरा, रूचि, हर्षा, स्मिता, आकांक्षा, विदुषी, अंकुर सहित 25 से ज्यादा छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने लक 20 एट कुड़ी दा, ढोल जगीरों दा, मुंदरी बनाई फिरे, ओ ओ हनी सिंह, मिक्स भं¡ड़ा सहित अन्य पंजाबी गीतों पर छात्राओं ने गिद्दा प्रस्तुत कर माहौल में पंजाबियत घोल दी। मिस फेयरवेल, मिस ईव, मिस आॅल राउंडर व अन्य का चयन करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं करवाई गई। अंत में पारूल ढिंगरा को मिस फेयरवेल, अंकिता को मिस ईव, सवि को मिस आॅल राउंडर, हर्षा को मिस थीम, आकांक्षा को मिस ब्यूटीफुल स्माइल, विदुषी को मिस टैलेंटिड, अंकुर कांबोज को मिस पंचुवल के खिताब से नवाजा गया। टीचर्स के लिए आयोजित म्यूजिकल चेयर रेस में कॉमर्स विभाग की प्राध्यापिका मीनू गुलाटी विजेता रहीं। निर्णायक मंडल में डोली लांबा, नेहा सहगल, मीनू गुलाटी व पसमीन शामिल रहीं।




Sunday, 25 March 2012

हैल्दी दांत ही मिशन डॉ. मानसी CITY NEWS YNR



  हैल्दी दांत ही डॉ. मानसी का मिशन
कई पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं

यमुनानगर। ‘पापा हॉस्टल अलाउ नहीं करते थे। एरिया में कोई अच्छा प्राइवेट स्कूल भी  नहीं था। इसके चलते 12वीं तक गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंड़री स्कूल  फाजिल्का में पढ़ाई की। गवर्नमेंट स्कूल्स में व्याप्त व्यवस्था को जितनी अच्छी तरह से मैं समझ सकती हूँ शायद ही कोई और समझे। यही कारण है कि आज मैं अपने डाक्टरी के पेशे के व्यस्त शेड्यूल में से समय निकालकर गवर्नमेंट स्कूल्स के बच्चों के लिए समय निकालती हूं’, यह कहना है समाज सेवा के बल पर समाज में अपनी अलग पहचन बना चुकी यमुनानगर की यंग एचिवर डेंटिस्ट डॉ. मानसी अबोहरी का।
32 वर्षीय डॉ. मानसी गवर्नमेंट स्कूल्स के बच्चों के डेंटल हैल्थ को लेकर इतनी पैशॉनेट है कि वह पिछले 7-8 सालों में 105 निशुल्क डेंटल चेकअप कैंप लगाकर गवर्नमेंट स्कूल्स के 10 हजार बच्चों का फ्री ट्रीटमेंट कर चुकी हैं। वह इस मिशन को ताउम्र चालू रखना चहती है।
डॉ. मानसी के मुताबिक वह चाहते हुए भी गवर्नमेंट स्कूल्स में इंफ्रास्ट्रक्चर तो उपलब्ध नहीं करवा सकती, परंतु एक डेंटिस्ट होने के नाते उन्होंने संकल्प लिया है कि गवर्नमेंट स्कूल्स के ज्यादा से ज्यादा बच्चों के दांत हैल्थी हो। इस मिशन को सक्शेस करने के लिए वह अब तक 10 हजार स्कूली बच्चों के दांतों का फ्री ट्रीटमेंट कर चुकी हूं। इसके लिए उन्होंने गवर्नमेंट से कोई फाइनेंशियल हैल्प भी  नहीं ली है।
बेसिकली पंजाब के फालिल्का टाउन से बिलॉंग करने वाली डॉ. मानसी  2002 में यमुनानगर के डेंटिस्ट डॉ. भानू अबोहरी से शादी करने के बाद से यमुनानगर में ही सैटल है। यहां वह अपने क्लीनिक के व्यस्त समय में से महीने में दो दिन स्कूल्स में कैंप लगाने के लिए निकालती है।
हालांकि डॉ. मानसी एक डाक्टर फेमिली से बिलॉंग करती है परंतु उन्होंने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी आफ हैल्थ साइंसेज से बीडीएस इसलिए की है कि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके। उनका मानना है कि महिलाओं को पढ़ाई के मामले में बिल्कुल भी  कंप्रोमाइज नहीं करना चाहिए। उन्हें ऐसी एजेकुशन लेनी चाहिए जिसके बल पर वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। जीवन में कई बार ऐसे क्षण भी आते हैं कि परिवार की पूरी जिम्मेदारी महिला के  ऊपर आ जाती है। यदि वह अपने पैरों पर खड़ी हो तो ऐसी जिम्मेदारी को वह बाखूबी निभा  सकती है।
बच्चों के हैल्थी दांतों के मिशन के अलावा डॉ. मानसी का एक ओर ड्रीम प्रोजेक्ट है। वह अपने रिसोर्सेज से गरीब छोटे बच्चों के लिए एक स्कूल  खोलना चाहती है, जिसमें बच्चे स्टडी कर शुरू से ही अपने पैरों पर खडेÞ होने की भविष्य में प्लान कर सके।
‘जब भी  मैं गवर्नमेंट स्कूल्स में जाती हूं मेरी आत्मा मुझे गरीब बच्चों के लिए कुछ खास करने के लिए कटोचती है। इसलिए मंने एक छोटे बच्चों के लिए छोटा सा स्कूल बनाने की ठानी है। इस प्रोजेक्ट को हकीकत बनने में अभी  लगभग टू ईर्य्स का टाइम लगेगा। मेरी एक इच्छा और है कि सभी गवर्नमेंट सर्वेंट्स के बच्चे गवर्नमेंट स्कूल्स में पढ़ाने कंपल्सरी हो। यदि ऐसा हो जाता है तो गवर्नमेंट स्कूल्स के माहौल में और सुधार होगा और देश में एक नए •                                                       भारत की तस्वीर बनेगी’
डॉ. मानसी को उनके उत्कृष्ठ कार्या के लिए वरिष्ठ नागरिक  संस्था डे केयर क्लब, सीनियर सिटीजन काउंसिल, आउट सटेंडिंग विमन एचिवमेंट अवार्ड, कुमारी सेलजा द्वारा महिला सशक्तिकरण अवार्ड, तमिलनाडू के पूर्व गवर्नर भीष्ण नारायण सिंह व उड़ीसा के पूर्व गवर्नर सईद सिबती रजी द्वारा राष्ट्रीय  अवार्ड समेत अनेक संस्थाएं उन्हें सम्मानित कर चुकी है।

Tuesday, 13 March 2012

कार्रवाई नहीं, अब करूंगी आत्मदाह CITY NEWS YNR





            कार्रवाई नहीं, अब करूंगी आत्मदाह 
पिता के शराब की लत से परेशान होकर कई जगह लगाई युवती ने गुहार

विनोद धीमान
 कहते है कि घर के मुख्या परिवार की रीढ़ की तरह काम करता है। लेकिन यदि मुख्या ही गलत राह पर चल पडेÞ तो यही रीढ़ कमजोर होकर खोखली होने लगती है। वहीं, परिवार में घरेलु परेशानियों का खामियाजा अन्य सदस्यों को उठाना पड़ता है। ऐसा ही एक किस्सा गांव हरनौल के परिवार में हुआ, जिस पर परिवार की एक युवती ने पत्राचार के माध्यम से अलग-अलग आलाधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक गुहार लगाई। गुहार के बाद भी  कोई कार्रवाई नहीं होने पर अब युवती परेशान होकर आत्मदाह करने की बात कह रही है।
गांव हरनौल निवासी गुरमीत देवी ने बताया कि उसके परिवार में उसके पिता  अत्याधिक शराब पीने के आदि है। जो उन्हें 13 साल पहले घर छोड़कर उनसे अलग हो गए। जिसके बाद परिवार की खुशियां भी  धीरे-धीरे खत्म होने लगी।  उसने बताया कि जैसे ही पिता घर छोड़कर चले गए तो परिवार में वह और उसके तीन भाई व मां परिवार में रह गए। परिवार की आमदन का कोई साधन नहीं रहा था, फिर कुछ समय बाद उसकी मां का भी देहांत हो चला। जिसके बाद अब वह और उसके छोटे भाई रह गए थे। किसी तरह व और उसके भाई घर चला रहे है। उसने बताया कि उसकी ही तरह घरेलु परेशानियों व शराब के सेवन से उजड़ते परिवारों की पुर्नवृति न हो इसके लिए उसने आलाअधिकारियों से मंत्रियों तक महिलाओं के उचित पालन-पौषण की गुहार लगाई। जिसमें उसने ग्रामीण स्तर पर शराबी परिवार की महिलाओं के लिए अलग से सुविधा का प्रबंध किए जाने की कोई सरकारी योजना लागू किए जाने की मांग की। उसने बताया कि उसने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री व अन्य मंत्रियों को भी  पत्राचार के माध्यम से यह मांग रखी, लेकिन ऐसा करते हुए उसे दो साल होने को है। लेकिन अब तक उसकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और न ही कोई जवाब भी  आया। इसी कारण अब उसने हताश होकर आत्मदाह करने की बात कहते हुए उसने कहा कि या तो राष्टÑपति उसे खुद आकर मिले या फिर उसकी मांग को लागू किए जाने के बारे में निर्णय लिया जाए। गुरमीत ने बताया कि जहां एक ओर सरकार महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए पे्ररित कर रही है, तो वहीं गांवों में इनकों जागरुक करने के लिए सरकार की ओर से कोई भी  कार्य नहीं किया जा रहा है। आज के समय में जहां देश की भाग-डोर जहां एक महिला राष्टपति के हाथ में है। वह भी  हम जैसी महिलाओं के बारे में ऐसा कोई कानून पास क्यों नहीं करती? जिससे शराबी परिवारों की महिलाओं को राहत मिल सके।