Sunday, 18 August 2013

किताबे की जगह हाथों में रेहडे की बांगडोर CITY NEWS YNR


किताबे की जगह हाथों में रेहडे की बांगडोर

षिक्षा को लेकर सरकार यहा कडे कदम उठा रही है तो वही बच्चो को षिक्षा देने वाले अध्यापक उनके हाथों में किताबे न देकर उनसे मंगवाते है उप्पले जिन छोटे छोटे मासूम बच्चों के हाथों में किताबे होनी चाहिए उन हाथों में रेहडे की बांगडोरऔर उपर उप्पले लाद कर बच्चे स्कूल में ले जाते है और इस बात पर अध्याकपो को षर्म नही बल्कि इन बच्चों पर गर्व है क्योंकि काम तो किसी न किसी से करवाना ही होता है मामला यमुनानगर जिले के गांव कनालसी का है यहा मासूमों के हाथों से किताबो को स्कूल में रखवाकर उनसे ऐसा घिनौना काम करवाया जाता है

गांव की गलिया और इन्ही के बीचों बीच एक जानवर को हाककर उसे रेहडे से लगाया जाता है और फिर इस पर लादे जाते है गोबर के उप्पले यह मामला यमुनानगर के गांव कनालसी का है यहा के सरकारी स्कूल के बच्चों को मिड डे मिल का खाना देने से पहले उनसे मंगवाए जाते है गांव से गोबर के उप्पले मासूमों के हाथों में जानवार की रस्सी दी जाती है जबकि झोटे जैसे जानवर को काबू करना किसी आम आदमी का खेल नही होता अपनी जान को जोखिम में डाल कर मासूम इसे स्कूल से तो ले जाते है और गांव के बाहर बने गुहारों में से इन उप्पलो को बच्चों के नर्म हाथों से लदवा कर उसे स्कूल तक ले जाया जाता है अगर इस मामले मे हल्की सी भी लापरवाही बरती गई तो हो सकता है एक बडा हादसा क्योंकि यहा गांव के गलिया कही पक्की है तो वही दूसरी तरफ गांव के बाहर ऐसा रास्ता भी है यहा से पैदल निकलना भी मुष्किल है पानी के बीच से झोटे रेहडे को हाककर यह लोग स्कूल में उप्पले लेकर जाते है और तभी इन मासूमों को मिलता है वहा मिड डे मील का खाना 
 
स्वयं काम कर रहे इन बच्चों को भी काफी मजा आता है स्कूल में टीचर की डांट से तो यही अच्छा है षायद यही सोच कर यह मासूम स्कूल से गांव की गलियों की और रूख कर देते है लेकिन इन्हें तो मालूम नही है कि इनसे क्या काम करवाए जाते है लेकिन स्कूल के मुख्याअध्यपक का इस पूरे मामले में क्या कहना है आप स्वय ही सुन लिजिए दराअस्ल इन जनाब का कहना है कि काम तो किसी न किसी को करना ही है और इन बच्चों ने अगर कर भी दिया तो क्या हुआ हालाकि जनाब मान भी रहे है कि आज स्वीपर नही आया और उनका काम इन बच्चों से लिया जा रहा है क्या कानून इस बात की आज्ञा देता हैै क्या षिक्षा विभाग के यही दावे है लेकिन यहा तो मासूमों से काम ही लेना है यह तो बडे ही आराम से प्रबंधक साहिब ने कह दिया लेकिन मिड डे मील का खाना बनाने वालों के बहाने भी अजीब ही सुनने को मिले इनकी माने तो स्कूल में गैस सिलेंडर ह नही है जबकि रसोई में साफ तोर पर सिलेंडर दिख रहा है लेकिन इनका कहना है कि यह तो पुराना है और इसे भरवाए काफी समय हो गया है लेकिन एक बात तो है कि चलो कोई अध्यापक तो है जो इस काम को गल्त बता रहा है और इन्होंने भी पहले तो कह दिया लेकिन बाद में जब अपने ही अध्यापको की बात आए तो इन जनाब ने भी जाने में भलाई समझी 






Sunday, 4 August 2013

हरियाली का त्यौहार है तीज CITY NEWS YNR


                               हरियाली का त्यौहार है तीज

 हरियाली का त्यौहार तीज जिसे हर विवाहिता बडे ही षोंक के साथ मनाती है हालाकि पहले तो महिलाए झूले झूल कर इस त्यौहार को अपनी हम उम्र के साथ इस त्यौहार को मनाती थी लेकिन आज यमुनानगर में इस त्यौहार को अलग ही तरीके से मनाया गया मंच के उपर हर उम्र की महिला ने अपने हुनर का लोहा मनवाया तो वही इस त्यौहार पर सैकडों महिलाओ ंने इक्टठे होकर गीत संगीत व नाच गाने के साथ साथ तरहा तरहा के खेल खेल कर इस सांझा किया 

सावन का महिना और उपर से तीज का त्यौहार ऐसे में महिलाओ का इस त्यौहार पर सोने पर सुहागा हो जाता है पहले तो पेडों पर बंधे हुए झूले पर जब नव विवाहिता झूले झूलती थी तो महिलाओं का हजुम इक्टठा हो जाता था लडकिया भी इस त्यौहार को अच्छे तरीके से मनाती थी लेकिन अब षहरों में इतने पेड तो रहे नही और न ह ीवह पहले जैसी बात लेकिन इस त्यौहार को फिर भी महिलाए अच्छे ढंग से मनाने के लिए एकजुट हो रही है आज यमुनानगर के डीएवी गर्ल्ज कालेज में सैकडों महिलाओ ने इक्टठे होकर तीज के त्यौहार को सांझा किया मंच के उपर न किसी की उम्र को देखा गया और न ही किसी के हुनर को लेकर अपने हुनर का लोहा मनवाने के लिए यमुनानगर तो क्या हरियाणा के कई जिलो में महिलाए यहा पहुंची थी मंच के उपर खूब नाच गाना हुआ और हरे रंग के लिबास में ज्यादातर महिलाए नजर आ रही थी तरहा तरहा के खेल खेले जा रहे थे लेकिन सभयता को कायम रखते हुए महिलाओं ने जमकर नाच गाना किया 

महिलाओ ंकी माने तो अब भी महिलाए लुक छीप कर इस त्यौहार को सांझा करती है लेकिन लडकिया व नवविवाहिता के मन से एक झीझक को निकाल कर अपनी प्रतिभा को सामने लाने के लिए ही मंच पर इक्टठा हुई है वही हरे रंग को महत्वता देते हुए उस महिला को भी सम्मानित किया जो महिला हरे रंग के लिबास में तो थी और उसने हरे रंग की चुडिया व मंहदी लगा रखी हो ऐसे में एक ही महिला सबके सामने आई और उसे सम्मानित भी किया गया जबकि आज इन विवाहता की माने तो यह त्यौहार हरे रंग का प्रतिक तो है ही लेकिन इसके साथ साथ वह इस त्यौहार को अपने सुसराल व पति की लंबी उम्र की कामना करने का भी है और सभी महिलाए इस त्यौहार पर अपने पति की लंबी उम्र के लिए एक दूसरे के साथ त्यौहार सांझा करती है जबकि इन महिलाओ का कहना है  िकवह आगे से दीवाली व करवाचौथ को भी इसी तरहा से मनाएगी ताकि इन महिलाओं का आपस में प्रेम व भाई चारा बने रहे




Saturday, 3 August 2013

तेज रफतार ने ली तीन लोगो की जान CITY NEWS YNR


                       तेज रफतार ने ली  तीन लोगो की जान

 यमुनानगर  के कस्बा रादौर स्थित आनाज मंडी के सामने तेज रफतार ने तीन लोगो की जान ले ली दराअस्ल दो बाइको पर स्वार चार लोगो की आमने सामने की टक्कर से तीन युवको की मौत हो गई जबकि लिफट लेकर एक बाइक के पीछे बैठी एक लडकी गंभीर रूप से घायल हो गई दोनों की आमने सामने की जब्रदस्त टक्कर थी एक बाइक स्वार हरिद्वार से जल लेने जा रहे थे जबकि दूसरी बाइक पर बैठे दोनो ंयुवक हरिद्वार से वापिस पेहवा आ रहे थे फिल्हाल पुलिस ने तीनों युवको के षवो को कब्जे में लेने के बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल यमुनानगर भेज कार्रावाई आरंभ कर दी है

यमुनानगर कुरूक्षेत्र हाईवे स्थित रादौर की आनाज मंडी के सामने एक बार फिर से तेज रफतार ने तीन युवको की जिंदगी निगल ली दराअस्ल यह दोनों बाइक स्वार कुरूक्षेत्र जिले के रहने वाले थे और दोनो की आमने सामने की टक्कर हुई थी इनमे एक बाइक स्वार पर बैठे दो युवक जोकि पेहवा के रहने वाले थे वह कावड लेकर हरिद्वार से वापिस आ रहे थे कि रादौर पहुंचने पर सामने से आ रही दूसरी बाइक से टकरा गए उस बाइक पर एक युवक व युवती बैठे हुए थे टक्कर इतनी जब्रदस्त थी कि तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल पहुंचते ही तीनो ने दम तोड दिया जबकि एक लडकी इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थी लउकी के अनुसार उसे ऐसा लगा कि उनकी बाइक किसी ट्रक के साथ टकरा गई है और वह बेसुध हो गई और उसे अस्पताल पहुंचने पर ही होष आया जबकि इस लडकी ने कुरूक्षेत्र से हरिद्वार जाने के लिए इस युवक से लिफट मांगी थी 
 
हादसे  के बाद जब पुलिस को इस घटना की सूचना मिली तो पुलिस ने मौके पर पहुंच कर तीनों युवको के षवो को कब्जे में ले लिया और उन्हे पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया वही लडकी से भी पुलिस पूछताछ कर रही है जबकि मृत्क युवको के पास से मिले मोबाइल से पुलिस ने उनके परिजनो को सूचित कर दिया परिजनो के अनुसार उनके बच्चे कावड लेने के लिए हरिद्वार गए थे फिल्हाल पुलिस ने षवो का पोस्टामार्टम करवाने के बाद अपनी कार्रावाई आरंभ कर दी



Wednesday, 22 May 2013

आयरन की गोलिया खाने से स्कूल के बच्चे बीमार CITY NEWS YNR



       आयरन की गोलिया खाने से स्कूल के बच्चे बीमार


यमुनानगर में एक के बाद एक आयरन की गोलिया खाने से स्कूल के बच्चे बीमार हो रहे है हालाकि इस मामले में प्रषासन को बच्चों की देखरेख के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देष देने चाहिए थे लेकिन लापरवाही के चलते एक ही कस्बे में दूसरी बार बच्चों के आयरन की गोलिया खाने से 18 बच्चों के बीमार होने से प्रषासन ने हडकंप जरूर मच गया है
यमुनानगर के कस्बा साढौरा के आसपास के गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाली आयरन की गोलिया खाने से कुद दिन पहले बीमार हुए स्कूली बच्चों का उपचार भी अभी पूरा नही हुआ था कि एक बार फिर से बच्चों के अचानक गोलिया खाने से बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आ गया दराअस्ल इस बार भी इसी कस्बे के गांव पाबनी के सरकारी स्कूल में 18 बच्चों के बीमार होने से प्रषासन में हडकंप मच गया बच्चों को आनन फानन में जगाधरी के सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया यहा सात बच्चों की हालत को नाजूक देखते हुए उन्हे ंतो दाखिल कर लिया जबकि बाकी बच्चों का इलाज कर उन्हें घर भेज दिया यह कोई पहला मामला नही है इससे पहले भी बच्चों के बीमार होने का मामले सामने आते रहे है बच्चों की माने तो स्कूल में जब आयरन की गोलियों को बाटा गया तो उन्हें खाते ही सब बच्चों के पेट में दर्द होने लगा और उल्टी जैसे मन होने लगा और बच्चों को इस हालत में देखने के बाद उन्हें स्कूल के अध्यापकों ने अस्पताल में ले गए यहा उन्हें जगाधरी रेफर कर दिया 
 
स्कूली बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलते ही स्कूल प्रषासन ने इस मामले की सूचना प्रषासन तक भी पहुंचा दी हालाकि बीमार बच्चों की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने आनन फानन में स्कूल का दौरा किया इस मामले में यमुनानगर के सीएमओ एम आर पासी का कहना है कि बच्चों ने खाली पेट गोलिया खा ली होगी तभी उन्हें ऐसा हुआ है जबकि वह मामले की जांच करेंगे और इन गोलियो को भी देखंगे कि इनको खाने से एक के बाद एक बच्चा बीमार क्यों हुआ है वही उन्हों हिदायत भी दी है स्कूलो ंमें इस प्रकार बांटी जाने वाली आयरन की गोलियो की चेक करने के बाद ही दे ताकि ऐसा किसी भी बच्चे के साथ न हो 



Tuesday, 30 April 2013

श्री कृष्ण करते हैं लोगों का बेड़ा पार CITY NEW YNR


श्री कृष्ण करते हैं लोगों का बेड़ा पार : अग्रवाल


श्री राधा-कृष्ण सखा मंडल वर्कशॉप द्वारा कराए जा रहे कार्यक्रम के पहले दिन भजन सम्राट विनोद अग्रवाल व बलदेव कृष्ण ने भजन वर्षा की। पहले दिन कार्यक्रम का शुभारंभ एचआर सरदाना व डॉ. रमेश कुमार ने की। भजन सुनने के लिए हजारों की संख्या में भक्त पूरे यमुनानगर व आसपास के जिला से पहुंचे थे। भजन सम्राट विनोद अग्रवाल के भजन सुनने के लिए शाम 6 बजे से ही भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। भीड़ इतनी थी कि पंडाल छोटा पड़ गया। 

कुछ रोज की जिंदगी है ढंग से जी लो : भजन सम्राट विनोद अग्रवाल ने कहा कि कुछ रोज की जिंदगी है इसे ढंग से जी लो। उन्होंने कहा कि भगवान के साथ हमें चलना चाहिए। यदि हम भगवान के बताए रास्ते पर चलेंगे तो वह भी हमारे साथ ही चलेंगे। यदि हम उसे अपनी सुनाएंगे तभी वे हमारी भी सुनेंगे। उन्होंने भजनों के माध्यम से भजन सम्राट विनोद अग्रवाल ने जहां ब्रजवासियों को भगवान का सबसे प्रिय बताया वहीं उन्होंने भगवान के बांके होने की भी गुणगान किया। जब तक भजन संख्या चलती रही तब तक महिला व पुरुष श्रद्धालु नाचते रहे। 
भजन संध्या में संस्कृति को बचाने का संदेश 
 श्री राधा कृष्ण सखा मंडल द्वारा विष्णुनगर में करायी जा रही भजन सर वर्षा में सिरसा से आए भजन गायक किशन दास ने यही संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपने बड़ों का सम्मान करना चाहिए। कृष्ण जी ने अपने माता-पिता को जो सम्मान किया। खुशी से नाचना अच्छी बात है। व्यक्ति जब भी खुश होता है तो वह नाचने लगता है। घर में कोई शादी समारोह हो तो हम डीजे की आवाज पर भी नाचते हैैं, लेकिन यदि हम डीजे में भगवान के गीत चलाकर नाचें तो हमारी संस्कृति भी बची रहेगी साथ ही हमारे संस्कार भी अच्छे होंगे। देर रात तक चली भजन संध्या में जहां श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। 
वहीं पूरा क्षेत्र जय श्री राधे जय श्री कृष्णा के जयकारों से गुंज उठा। आयोजकों ने सभी भक्तों से आग्रह किया कि अपनी-अपनी क्षमता अनुसार कन्याओं की शादी के लिए दान जमा करवाएं। श्री राधा कृष्ण सखा मंडल के सदस्य सुशील अरोड़ा ने बताया कि पांच गरीब कन्याओं की शादी के लिए शहरवासियों द्वारा भरपूर सहयोग किया जा रहा है।
श्री राधा कृष्ण सखा मंडल द्वारा कराई जा रही भजन रस वर्षा संपन्न, 5 कन्याओं का सामूहिक विवाह हुआ 
श्री राधा कृष्ण सखा मंडल द्वारा करवाए जा रहे भजन रस वर्षा का समापन पांच कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह के साथ संपन्न हो गया।तीसरे दिन भजन गायिका अल्का गोयल ने भजन अमृत वर्षा की। भजन संध्या में मुख्य यजमान समाजसेवक गणेश गुप्ता, गजेंद्र कपूर, महेंद्र कुमार, दर्शन लाल व मदन मोहन अरोड़ा रहे। श्रद्धालुओं ने भजन संध्या का आनंद उठाया व दंपतियों को आशीर्वाद देकर उनके सुखी जीवन की कामना की। इसके साथ ही सामूहिक विवाह समारोह में आई बारात का स्वागत आयोजकों द्वारा किया गया। 
श्री राधा कृष्ण सखा मंडल द्वारा शादी में बर्तन, सिलाई मशीन, बिजली का चूल्हा, डिनर सैट, मिक्सी, कूकर, छत्त का पंखा, फर्राटा, प्रैस, चपाती बोक, वाटर कैंपर, दीवार की घड़ी, बाल्टी, गद्दे, रजाई, हैंड बैग, चांदी का मंगलसूत्र, पाजेब, सोने का कोका, लेडिज सूट, साड़ी, जैंटस सूट, चादर, तोलिए, दुपट्टे व मेकअप किट देकर कन्याओं की विदाई की गई। मौके पर सखा परिवार के सुशील कुमार अरोड़ा, तिलक राज, हरजीता नंद, दिनेश कुमार, राङ्क्षजद्र मोदी, नीतिन कुमार, राकेश शर्मा, प्रवीण कुमार, बलदेव राज, प्रमोद कथूरिया, राजू कथूरिया व अतुल चोपड़ा मौजूद रहे। 
इनका हुआ विवाह : कैंप निवासी दीप्ति, वर्कशाप निवासी रीना, अंबेदकर विहार निवासी पूजा, विष्णु नगर रेणु व अंबेदकर नगर की सीमा की शादी खारवन गांव के प्रदीप कुमार, रामपुर शाहा के विजय पाल, गांव कैल के जय किशन, फिरोजपुर पंजाब के हेत राम व मुस्तफाबाद के चरण ङ्क्षसह के साथ हुई। 





Sunday, 21 April 2013

चूल्हे की रोटी का स्वाद ही न्यारा सै CITY NEWS YNR



  चूल्हे की रोटी का स्वाद ही न्यारा सै 
सब्सिडी के सिलेंडर कम करने से ग्रामीणों ने निकाला रास्ता, फिर से दिखने लग गए हैं घरों में मवेशी 
विनोद धीमान
जगाधरी वर्कशॉप। सरकार द्वारा सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या सीमित करने से एक बार तो महिलाओं को जोर का झटका लगा था, लेकिन अब उन्होंने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। गैस की जगह फिर से घर के आंगन में चूल्हा जल गया है। महिलाएं अब एलपीजी चूल्हे पर केवल नाममात्र का कार्य करती हैं और खाना बनाने का पूरा कार्य चूल्हे पर कर रहीं हैं। इससे पैसे की बचत तो हो ही रही है, साथ ही सिलेंडर खत्म होने के टेंशन से भी छुटकारा मिल गया है।
शहरी क्षेत्र की तर्ज पर देहात की महिलाएं घरेलू कार्य के लिए पूरी तरह से एलपीजी पर निर्भर हो चुकीं थीं। गांवों में भी चूल्हा बीते जमाने की बात बनकर रह गया था। सरकार द्वारा 21 दिन में उपभोक्ताओं को सब्सिडी पर सिलेंडर मुहैया करा दिया जाता था। अब सरकार ने अचानक प्रतिवर्ष केवल नौ सिलेंडर सब्सिडी पर देने का फैसला लिया है। खाना बनाने के लिए एलपीजी पर निर्भर रहने वाली महिलाओं ने सरकार को इसका जवाब दे दिया है। महिलाओं ने फिर से अपनी पुरानी परंपरा के मुताबिक चूल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है।
पैसे की बचत, टेंशन फ्री :
कैल गांव की शान्ती देवी ने बताया कि चूल्हे पर खाना बनाने के दो फायदे हैं। एक तो पैसे की बचत होती है, दूसरा सिलेंडर खत्म होने की परेशानी से छुटकारा मिल गया है। चूल्हे पर गैस की बजाय थोड़ा देरी से खाना जरूरत बनता है, लेकिन इसके लिए भी उन्होंने टाइम टेबल बना लिया है। जहां सुबह पांच बजे उठना पड़ता था, अब साढ़े चार बजे उठकर चूल्हा शुरू करना पड़ता है।
                                                                    चूल्हे का खाना है पौष्टिक 
कासंपुर की महिला इन्दु राणा ने कहा कि बेटा चूल्हे का खाना पौष्टिक होता है। गैस पर पकने वाली रोटी से मोटापा होता है। कुकर पर बनने वाली सब्जी से ज्यादा स्वाद सब्जी चूल्हे पर डेगची में बनने वाली सब्जी होती है। बीते दिनों की याद ताजा करते हुए कहा कि जब तैरे ताऊ घर आते थे तो चूल्हे के सामने बैठकर ही रोटी खाया करते थे। स्वाद-स्वाद में दो-तीन रोटी फालतू खा जाया करते। इब तो गैस की दो रोटी भी पूरा दिन कलेजे में धरी रहवै सै।
घरों में फिर आए पशु : 
ससोली गांव निवासी सीमा देवी ने कहा कि घरों में फिर से भैंस व गाय आ गई हैं। चूल्हे के लिए उपले और उपलों के लिए भैंस व गाय का गोबर चाहिए। इससे ग्रामीणों ने पशु रखने शुरू कर दिए हैं। पशु रखने से भी दो फायदे हैं। एक तो शुद्ध दूध घर का होता है और दूसरा उपले बनाने के लिए गोबर मिल जाता है।


चूल्हे की रोटी का स्वाद ही न्यारा सै CITY NEWS YNR



  चूल्हे की रोटी का स्वाद ही न्यारा सै 
सब्सिडी के सिलेंडर कम करने से ग्रामीणों ने निकाला रास्ता, फिर से दिखने लग गए हैं घरों में मवेशी 
विनोद धीमान
जगाधरी वर्कशॉप। सरकार द्वारा सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या सीमित करने से एक बार तो महिलाओं को जोर का झटका लगा था, लेकिन अब उन्होंने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। गैस की जगह फिर से घर के आंगन में चूल्हा जल गया है। महिलाएं अब एलपीजी चूल्हे पर केवल नाममात्र का कार्य करती हैं और खाना बनाने का पूरा कार्य चूल्हे पर कर रहीं हैं। इससे पैसे की बचत तो हो ही रही है, साथ ही सिलेंडर खत्म होने के टेंशन से भी छुटकारा मिल गया है।
शहरी क्षेत्र की तर्ज पर देहात की महिलाएं घरेलू कार्य के लिए पूरी तरह से एलपीजी पर निर्भर हो चुकीं थीं। गांवों में भी चूल्हा बीते जमाने की बात बनकर रह गया था। सरकार द्वारा 21 दिन में उपभोक्ताओं को सब्सिडी पर सिलेंडर मुहैया करा दिया जाता था। अब सरकार ने अचानक प्रतिवर्ष केवल नौ सिलेंडर सब्सिडी पर देने का फैसला लिया है। खाना बनाने के लिए एलपीजी पर निर्भर रहने वाली महिलाओं ने सरकार को इसका जवाब दे दिया है। महिलाओं ने फिर से अपनी पुरानी परंपरा के मुताबिक चूल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है।
पैसे की बचत, टेंशन फ्री :
कैल गांव की शान्ती देवी ने बताया कि चूल्हे पर खाना बनाने के दो फायदे हैं। एक तो पैसे की बचत होती है, दूसरा सिलेंडर खत्म होने की परेशानी से छुटकारा मिल गया है। चूल्हे पर गैस की बजाय थोड़ा देरी से खाना जरूरत बनता है, लेकिन इसके लिए भी उन्होंने टाइम टेबल बना लिया है। जहां सुबह पांच बजे उठना पड़ता था, अब साढ़े चार बजे उठकर चूल्हा शुरू करना पड़ता है।
चूल्हे का खाना है पौष्टिक 
कासंपुर की महिला इन्दु राणा ने कहा कि बेटा चूल्हे का खाना पौष्टिक होता है। गैस पर पकने वाली रोटी से मोटापा होता है। कुकर पर बनने वाली सब्जी से ज्यादा स्वाद सब्जी चूल्हे पर डेगची में बनने वाली सब्जी होती है। बीते दिनों की याद ताजा करते हुए कहा कि जब तैरे ताऊ घर आते थे तो चूल्हे के सामने बैठकर ही रोटी खाया करते थे। स्वाद-स्वाद में दो-तीन रोटी फालतू खा जाया करते। इब तो गैस की दो रोटी भी पूरा दिन कलेजे में धरी रहवै सै।
घरों में फिर आए पशु : 
ससोली गांव निवासी सीमा देवी ने कहा कि घरों में फिर से भैंस व गाय आ गई हैं। चूल्हे के लिए उपले और उपलों के लिए भैंस व गाय का गोबर चाहिए। इससे ग्रामीणों ने पशु रखने शुरू कर दिए हैं। पशु रखने से भी दो फायदे हैं। एक तो शुद्ध दूध घर का होता है और दूसरा उपले बनाने के लिए गोबर मिल जाता है।